Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने ‘समाधान समारोह-2026’ के तहत ज्ञानवापी मस्जिद, श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल शाही जामा मस्जिद विवाद से जुड़े सभी पक्षकारों को नोटिस भेजकर आपसी सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रस्ताव दिया था. यह विशेष लोक अदालत 21 से 23 अगस्त के बीच आयोजित होनी है, जहां बातचीत के जरिए लंबित मामलों को निपटाने की कोशिश की जाएगी. लेकिन तीनों मामलों में हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष, दोनों ने इस प्रस्ताव में शामिल होने से इनकार कर दिया है.
दोनों पक्षों का एक ही तर्क फैसला अदालत ही करे
ज्ञानवापी, मथुरा और संभल से जुड़े याचिकाकर्ताओं और मस्जिद प्रबंधन समितियों का कहना है कि ये सामान्य संपत्ति विवाद नहीं हैं. इन मामलों में धार्मिक आस्था, संवैधानिक अधिकार, ऐतिहासिक दावे और करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं. इसलिए इनका समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होना चाहिए. पक्षकारों का मानना है कि इनका अंतिम फैसला केवल अदालत ही कर सकती है, इसका फैसला किसी लोक अदालत या मध्यस्थता मंच पर नहीं हो सकता.
क्या हैं तीनों विवाद?
ज्ञानवापी विवाद: वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर है. हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां प्राचीन मंदिर मौजूद था, जिसे मुगल काल में ध्वस्त कर मस्जिद बनाई गई. सोमनाथ व्यास के परिवार द्वारा मस्जिद के तहखाने में 1993 तक हिंदू प्रार्थनाएं की जाती थीं. वहीं मुस्लिम पक्ष इस दावे को खारिज करते हुए मस्जिद पर अपने ऐतिहासिक अधिकार का दावा करता है. उनका कहना है कि मस्जिद औरंगजेब के शासनकाल से पहले की है और समय के साथ इसमें कई बदलाव हुए हैं.
मथुरा विवाद: मथुरा विवाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह परिसर से जुड़ा है. हिंदू पक्ष का कहना है कि मस्जिद भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली की भूमि पर बनाई गई,हिंदू पक्ष ने मस्जिद को उसके वर्तमान स्थान से हटाने की मांग की है.
जबकि मुस्लिम पक्ष इस दावे का विरोध करता है. यह मामला भी विभिन्न अदालतों में लंबित है.
संभल विवाद: संभल की एक सिविल अदालत ने 19 नवंबर 2024 को एक अधिवक्ता आयुक्त को संभल में शाही जामा मस्जिद का सर्वे करने का निर्देश दिया. इस आदेश के बाद हुई पत्थरबाजी और गाड़ियों में आग लगाने की घटनाओं में कथित तौर पर 4 लोगों की मौत हो गई. 24 नवंबर को पुलिस कर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा भड़क उठी, जब सर्वेक्षकों को एक टीम शाही जामा मस्जिद का दूसरा सर्वे करने के लिए चंदौसी कस्बे पहुंची.
अब लोक अदालत में नहीं जाएगा मामला!
सूत्रों की मानें तो दोनों पक्षों के इस रुख के बाद अब चर्चित मामलों के अगस्त में होने वाली विशेष लोक अदालत में शामिल होने की संभावना लगभग खत्म हो गई है. समाधान समारोह 2026 की घोषणा इस साल अप्रैल में की गई थी.
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