Washington : Greenland पर अमेरिकी कब्जे के विरोध में अमेरिका और यूरोपिय देश आमने-सामने हो गए हैं। ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी टैरिफ ठोंका तो जर्मनी ने अपने कदम पीछे खींच लिए .हालांकि, 8 देश अभी भी अपनी तोपें ताने खड़े हैं. फाइटर जेट्स भी उतार दिए हैं.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी की सेना ने Greenland से अपनी ‘टोही टीम’ को वापस बुलाना शुरू कर दिया है. रिपोर्ट है कि 15 जर्मन सैनिक एक सिविलियन फ्लाइट से कोपेनहेगन के लिए रवाना हो रहे हैं. इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारी दबाव और धमकी के सीधे असर के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन जहां जर्मनी ने सामरिक संयम दिखाया है, वहीं राजनीतिक मोर्चे पर यूरोप ने अमेरिका के सामने झुकने से साफ इनकार कर दिया है. 8 यूरोपीय देशों ने एक जुट होकर मुकाबले का ऐलान किया है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया. यह आदेश सीधे तौर पर अमेरिका के सबसे पुराने सहयोगियों की अर्थव्यवस्था पर हमला है. ट्रंप ने डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. ये वही देश हैं जिन्होंने हाल ही में Greenland में अपनी छोटी सैन्य टुकड़ियां तैनात की थीं.
टैरिफ का गणित
1 फरवरी से इन देशों के सामानों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा.
1 जून से अगर बात नहीं मानी गई, तो यह टैरिफ बढ़कर 25% हो जाएगा.
ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ये प्रतिबंध तब तक लागू रहेंगे जब तक अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीद नहीं लेता.
यह इतिहास में पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाटो सहयोगियों के खिलाफ ‘जमीन खरीदने’ के लिए आर्थिक प्रतिबंधों का हथियार इस्तेमाल किया है.
जर्मनी का ‘यू-टर्न’
जर्मनी के अपने 15 सैनिकों की टोही टीम को वापस बुलाना इस बात का संकेत है कि बर्लिन, वाशिंगटन के साथ सीधे सैन्य टकराव या तनाव को बढ़ाना नहीं चाहता. हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे ‘री-डिप्लॉयमेंट’ कहा जा सकता है, लेकिन विश्लेषक इसे ट्रंप की धमकी के बाद ‘डैमेज कंट्रोल’ की कोशिश मान रहे हैं. जर्मनी की अर्थव्यवस्था पहले ही मंदी के दौर से गुजर रही है, और वह अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर का जोखिम नहीं उठाना चाहता.
यूरोप का पलटवार- हम एकजुट हैं
भले ही जर्मनी ने सैनिक हटा लिए हों, लेकिन यूरोपीय यूनियन की लीडरशिप ने ट्रंप के सामने सीना तान दिया है. यूरोपीय यूनियन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ट्रंप के दबाव का जवाब एकजुटता से दिया है. उन्होंने ‘X’ पर लिखा, हमने लगातार Greenland आर्कटिक में शांति और सुरक्षा के अपने साझा ट्रान्साटलांटिक हितों को रेखांकित किया है. डेनमार्क का वह अभ्यास जिसमें यूरोपीय सैनिक शामिल थे पहले से तय था. यह किसी के लिए कोई खतरा नहीं है. उन्होंने चेतावनी दी कि टैरिफ ट्रान्साटलांटिक संबंधों को कमजोर करेंगे और एक खतरनाक गिरावट का जोखिम पैदा करेंगे. यूरोप अपनी संप्रभुता बनाए रखने के लिए एकजुट, समन्वित और प्रतिबद्ध रहेगा.
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काजा कैलास बोले- चीन और रूस मना रहे जश्न
ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने इस झगड़े का सबसे कड़वा सच दुनिया के सामने रखा. उनका मानना है कि जब दो दोस्त अमेरिका और यूरोप लड़ते हैं, तो फायदा दुश्मन का होता है. उन्होंने लिखा, चीन और रूस के लिए तो यह मजे का दिन होगा. सहयोगियों के बीच विभाजन का फायदा उन्हीं को मिलता है. अगर ग्रीनलैंड की सुरक्षा खतरे में है, तो हम इसे नाटो के भीतर सुलझा सकते हैं, प्रतिबंध लगाकर नहीं. कैलास ने यह भी याद दिलाया कि यह विवाद यूक्रेन में चल रहे युद्ध से ध्यान भटका रहा है, जहां रूस लगातार हमले कर रहा है. ट्रंप के टैरिफ यूरोप और अमेरिका दोनों को गरीब बनाएंगे और हमारी साझा समृद्धि को खत्म कर देंगे.
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मैक्रों बोले- संप्रभुता पर समझौता नहीं
इमैनुएल मैक्रों फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कड़े शब्दों में कहा, फ्रांस राष्ट्रों की संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है. कोई भी धमकी या डराने की कोशिश हमें प्रभावित नहीं करेगी- न यूक्रेन में, न ग्रीनलैंड में और न ही दुनिया में कहीं और. टैरिफ की धमकियां अस्वीकार्य हैं.



