US Iran Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर ईरान के साथ लड़ाई कम करने का फैसला किया है. जिसके चलते ट्रंप ने ईरान पर बड़े हमले को फिलहाल रोक दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर एयर डिफेंस की कमी के चलते ट्रंप ने यह फैसला लिया है. ट्रंप लगातार 2 हफ्ते तक ईरान पर भारी बमबारी के बाद अमेरिकी तनाव कम करना चाहते हैं.
द न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ मीटिंग के बाद नए हमले रोकने का आदेश दिया है. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की ओर से चेतावनी दी गई है कि अगर सैन्य अभियान और आगे बढ़ाया गया तो मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सेना के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों और अन्य एयर डिफेंस हथियारों का भंडार कम हो सकता है.
“अमेरिका जरूरत पड़ने पर बड़े सैन्य अभियान के लिए तैयार है”
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े हमले की मंशा बनाई थी, जिसपर जॉइंट चीफ ऑफ स्टॉफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने सलाह दी कि बड़े हमले की वजह से मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकं और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अप्रैल के अंत तक 1200 से ज्यादा पैट्रियट एंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल कर चुका है. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का ईरान पर हमले रोकने का फैसला अस्थायी है या लंबे समय तक लागू रहेगा. हालांकि अमेरिका जरूरत पड़ने पर बड़े सैन्य अभियान के लिए तैयार है.
“अमेरिका के मौजूदा हालात अच्छे नहीं है”
दूसरी तरफ ईरानी सेना ने दावा किया है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट और ईरान दोनों मोर्चों पर अपने मकसद पूरे नहीं कर पाया. सेना के प्रवक्ता जनरल अबोलफजल शेखारची ने कहा कि मौजूदा हालात अमेरिका के लिए अच्छे नहीं है.
“कुवैत ने ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया”
वहीं कुवैत ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमले करने की साजिश को सिरे से खारिज किया है. कुवैत सरकार ने कहा कि उन्होंने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लिया और न ही हमलों के लिए अपनी जमीन, हवाई क्षेत्र या समुद्री मार्ग का इस्तेमाल होने दिया. कुवैत की यह सफाई वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट की रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें दावा किया गया था कि ईरान द्वारा खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन ने ईरान के अंदर लड़ाकू विमान भेज थे. कुवैत के राजदूत शेखा अल जैन अस सबा ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह बेबुनियाद बताया.


