TMC : ममता बनर्जी ने टीएमसी के नाम और सिंबल ‘जोड़ा घास फूल’ पर अपने दावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं। ममता ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को पक्षकार बनाया है। उधर एक नए घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल के रेजीनगर उपचुनाव में मैदान से हटने की घोषणा करने वाले टीएमसी उम्मीदवार रविउल आलम चौधरी ने अपना निर्णय पलटते हुए चुनाव लडने का ऐलान किया है। आज ही सुबह उन्होने नामांकन वापस लेने की बात कही थी।
एक दिन पहले ही चुनाव आयोग ने जारी किए सिंबल
बता दें कि 17 सितंबर को चुनाव आयोग ने दोनों टीएमसी गुटों को मूल नाम और चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने से रोकते हुए अलग-अलग नाम और सिंबल दिए थे। अब दोनों गुट उपचुनाव में नई पार्टी नाम और सिंबल से चुनाव लड़ेंगे। ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ सिंबल मिला, जबकि अरूप रॉय गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ सिंबल आवंटित किया गया।
फिर से चुनाव लड़ने का ऐलान
पश्चिम बंगाल की रेजीनगर सीट पर उपचुनाव में ममता बनर्जी के टीएमसी गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार दोपहर फिर से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। सुबह उन्होंने नामांकन वापस लेने की बात कही थी। इसकी वजह उन्होंने टीएमसी का पुराना चुनाव चिह्न ट्विन फ्लावर्स यानी जोड़ा घास फूल नहीं मिलना बताया था।
TMC और कांग्रेस उम्मीदवार के रोचक घटनाक्रम
बता दें कि एक दिन पहले शुक्रवार को नंदीग्राम में ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था। इसके कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान को 2007 के एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जबकि रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई।
TMC के नाम और सिंबल को लेकर विवाद
जानकारी के अनुसार टीएमसी में विवाद मई के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद शुरू हुआ। जून में 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना। स्पीकर ने भी उन्हें मान्यता दे दी। इसके बाद पार्टी में 28 साल में पहली बार टूट हो गई। इसके बाद दोनों गुटों ने टीएमसी के नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिन्ह पर दावा किया। इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को पुराने नाम और सिंबल इस्तेमाल करने से रोक दिया।
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