BRICS Summit 2026: नई दिल्ली घोषणा में BRICS देशों ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी. सदस्य देशों ने आतंकवाद के हर रूप और हर कारण को अस्वीकार करते हुए साफ कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म,राष्ट्रीयता या समुदाय से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.घोषणा में सीमा पार आतंकवाद,आतंकी फंडिंग और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने देने वालों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया.
फंडिंग और पनाह देने वालों पर कार्रवाई
BRICS देशों ने आतंकियों और आतंकी संगठनों की जवाबदेही तय करने,उनकी आर्थिक मदद रोकने और उन्हें संरक्षण देने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई की बात कही। साथ ही अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र की प्रस्तावित व्यापक संधि को जल्द अपनाने की मांग भी दोहराई गई.घोषणा में आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता और सहमति आधारित निर्णयों को BRICS की मूल ताकत बताया गया.
टैरिफ और परमाणु खतरे पर चिंता
घोषणा में एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों पर भी चिंता जताई गई। सदस्य देशों ने कहा कि व्यापार संबंधी कदम विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप होने चाहिए। बढ़ते वैश्विक तनाव और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे पर भी गंभीर चिंता दर्ज की गई।
मोदी ने रखा अगले 20 साल का एजेंडा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS के अगले 20 वर्षों के लिए नया एजेंडा बनाने और फैसलों पर अमल की स्थायी व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी के वैश्विक नियम तय करने में ग्लोबल साउथ की बराबर भागीदारी की वकालत की। युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं के प्रशिक्षण तथा संकट में फंसे नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क बनाने का सुझाव भी दिया।
मतभेदों के बीच बनी सहमति
पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर ईरान और UAE के अलग-अलग रुख के बावजूद नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली.कई दौर की बातचीत के बाद बनी इस सहमति में भारत की मध्यस्थ भूमिका अहम रही. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया का भविष्य साझा है, इसलिए उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास समान रूप से होना चाहिए.
BRICS समिट में PM मोदी के बयान की 5 अहम बातें
1. अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा:प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS के अगले 20 वर्षों के लिए नया एजेंडा तैयार करने और लिए गए फैसलों को जमीन पर लागू करने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा.
2. ग्लोबल साउथ की बराबर भागीदारी: PM मोदी ने कहा कि AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों के वैश्विक नियम बनाने में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की बराबर भागीदारी होनी चाहिए.
3. युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को तैयार करने पर जोर:प्रधानमंत्री ने युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय वार्ता, कूटनीति और कानून की बेहतर ट्रेनिंग देने के लिए BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया.
4. संकट में फंसे नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क: मोदी ने BRICS देशों के बीच ऐसा इमरजेंसी नेटवर्क बनाने की बात कही, जिससे संकट में फंसे नाविकों को इलाज, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकासी में तुरंत मदद मिल सके.
5. भविष्य साझा है तो फैसले का अधिकार भी सबका:प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब दुनिया का भविष्य सभी देशों से जुड़ा है, तो वैश्विक फैसले लेने और नियम तय करने में भी सभी देशों को समान अधिकार और भागीदारी मिलनी चाहिए.



