Mobile Production : देश में मोबाइल बनाने और उसे विदेशों में बेचने की महत्वाकांक्षी योजना अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने से दूर हो गई है। देश को इलेक्ट्रिोनिकी परियोजना के लक्ष्य को पूरा करने में अभी पांच साल और लग सकते हैं। बता दें कि 2022 में इलेक्ट्रिोनिकी परियोजना बनाई गई थी और 2026 तक 126 अरब डॉलर का उत्पादन मूल्य हासिल करना था जिसमें करीब 58 अरब डॉलर का निर्यात होता।
ये तीन कारण रहे
इसकी वजह मोबाइल की घरेलू मांग में कमी आना थी, खासकर तब जब सरकार ने मोबाइल फोन पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया। दूसरी वजह चीन के ब्रांडों का निर्यात करने में नाकाम रहना था, जिनका भारतीय बाजार पर दबदबा था। जबकि सरकार ने इसके लिए कई बार कोशिशें कीं और उन्होंने खुद भी निर्यात करने का वादा किया था। तीसरी वजह थी देश की प्रमुख कंपनियों का खराब प्रदर्शन। ये वे देसी कंपनियां थीं जिन्हें मोबाइल के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत बढ़ावा दिया गया था, इस उम्मीद में कि वे अपने ब्रांड बनाएंगी। लेकिन डिक्सन टेक्नॉलजीज जैसी कुछ कंपनियों को छोड़कर ज्यादातर कंपनियां उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाईं या प्रोत्साहन के लिए जरूरी शर्तों को भी पूरा नहीं कर सकीं।
गलवान झड़प का असर निर्यात पर भी पड़ा
विश्लेषकों का कहना है कि गलवान में भारत-चीन सीमा पर हुई झड़पों का असर निर्यात पर भी पड़ा। भारत ने चीनी पुर्जा कंपनियों के लिए सीधे या संयुक्त उद्यमों के जरिये अपने यहां आने के रास्ते बंद कर दिए थे। इसका असर ऐपल इंक जैसी कंपनियों पर पड़ा, जिनको देसी और गैर-चीनी कंपनियों के साथ नई आपूर्ति श्रृंखला बनानी पड़ी। इस सबमें समय लगा।
लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद
पिछले सप्ताह नई मोबाइल योजना अधिसूचित होने के बाद आईसीईए के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक वित्त वर्ष 2031 तक भारत का उत्पादन मूल्य 110 से 120 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और निर्यात दोगुना होकर 60 अरब डॉलर हो सकता है।
बिक्री में सुस्ती खत्म होने का इंतजार
एसोसिएशन के अधिकारियों का कहना है कि अंतिम आंकड़े इस बात पर भी निर्भर करेंगे कि मोबाइल फोन की बिक्री में आई सुस्ती कब खत्म होती है। मेमरी की अधिक कीमतों के कारण वित्त वर्ष 2027 में मोबाइल फोन की बिक्री में 14 प्रतिशत से अधिक की गिरावट की आशंका है। अगर यह सुस्ती खत्म होती है, तो बिक्री के आंकड़े बढ़ सकते हैं।
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