Dharmendr Gehlot : नगर निगम अजमेर के चुनाव से पहले भाजपा की अंदरूनी सियासत में बड़ा विस्फोट सामने आया है। नगर निगम अजमेर के पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर विधानसभा अध्यक्ष एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। गहलोत के इस्तीफे को अजमेर भाजपा की चुनावी राजनीति के लिहाज से बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। धर्मेंद्र गहलोत ने वीडियो जारी कर सीधे देवनानी को चुनौती देते हुए कहा, “तुमने अभी मुझे पहचाना नहीं। मैं उन वीर कुमारजी का चेला हूं, जो कभी किसी के सामने नहीं झुके। धर्मेंद्र गहलोत मिटने को तैयार है, लेकिन तेरे सामने झुकने को तैयार नहीं है। तुम्हारे और मेरे बीच जो लड़ाई है, वो जारी रहेगी।”
देवनानी पर लगाए गंभीर आरोप
गहलोत ने वासुदेव देवनानी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी नीति उनके खिलाफ खड़े होने वाले व्यक्ति को झुकाने और समाप्त करने की रही है। गहलोत का दावा है कि इसी प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए चुनाव के समय दबाव बनाने के लिए स्वायत्त शासन विभाग से पुराने मामलों को लेकर पत्र जारी करवाए गए। गहलोत ने इन मामलों को करीब 5 से 6 वर्ष पुराना बताते हुए सवाल उठाया कि चुनाव के ठीक पहले इन मामलों को सक्रिय करने की जरूरत क्यों पड़ी।
विधानसभा चुनाव के बाद से बढ़ती रही तल्खी
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधानसभा चुनाव के बाद से ही धर्मेंद्र गहलोत और वासुदेव देवनानी के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार गहराते गए। अब भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे के बाद यह विवाद खुली राजनीतिक लड़ाई में तब्दील होता दिखाई दे रहा है।
नगर निगम चुनाव में दिख सकता है असर
गहलोत के इस्तीफे का सबसे बड़ा राजनीतिक असर आगामी नगर निगम अजमेर चुनाव पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा के लिए चुनौती सिर्फ गहलोत के इस्तीफे तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि उनके समर्थकों और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी पार्टी के भीतर चिंता बढ़ सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के एक वर्ग का अनुमान है कि धर्मेंद्र गहलोत आगामी नगर निगम चुनाव में वासुदेव देवनानी को राजनीतिक चुनौती देने के लिए नया मोर्चा तैयार कर सकते हैं। इसी क्रम में ज्ञान सारस्वत के साथ संभावित राजनीतिक गठजोड़ और अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशी उतारने की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में हैं। हालांकि, इस संभावित रणनीति की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस्तीफा या बड़े राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत?
धर्मेंद्र गहलोत का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब अजमेर में नगर निगम चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि गहलोत भाजपा से अलग हुए हैं, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि क्या यह इस्तीफा आने वाले नगर निगम चुनाव में देवनानी के खिलाफ एक संगठित राजनीतिक मोर्चे की शुरुआत है? अजमेर भाजपा के लिए आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यदि गहलोत अपने राजनीतिक प्रभाव को चुनावी मैदान में सक्रिय रूप से इस्तेमाल करते हैं, तो मुकाबला केवल भाजपा बनाम विपक्ष नहीं रहकर भाजपा के भीतर और बाहर बने नए राजनीतिक समीकरणों का मुकाबला भी बन सकता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि धर्मेंद्र गहलोत का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा—सिर्फ विरोध, संगठन के समानांतर मोर्चा या फिर नगर निगम चुनाव में सीधे मैदान में उतरकर वासुदेव देवनानी को चुनौती।
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