RSPCB : शहर के पंचशील ई-ब्लॉक क्षेत्र में निर्माणाधीन एक बहु-आवासीय ग्रुप हाउसिंग परियोजना पर्यावरणीय नियमों के कथित उल्लंघन के चलते जांच के घेरे में आ गई है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) ने परियोजना का निर्माण कर रही मैसर्स दीपमाला इन्फ्रास्टेट एंड टाउंस प्राइवेट लिमिटेडको जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई अजमेर के सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद् बाबूलाल साहू की शिकायत के आधार पर की गई है।
शिकायत के बाद हुआ औचक निरीक्षण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचशील ई-ब्लॉक स्थित निर्माणाधीन परियोजना में बिना आवश्यक पर्यावरणीय अनुमतियों के निर्माण कार्य किए जाने तथा ध्वनि एवं वायु प्रदूषण फैलाने की शिकायत राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिली थी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए बोर्ड के किशनगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय के कनिष्ठ पर्यावरण अभियंता (JEE) प्रकाश चंद बालीवाल ने 9 जून 2026 को परियोजना स्थल का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण में सामने आया नियमों के उल्लंघन का मामला
निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी द्वारा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना की सहमति (Consent to Establish – CTE) तथा राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) से आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त किए बिना ही बड़े स्तर पर निर्माण कार्य संचालित किया जा रहा था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।
बोर्ड ने मांगा जवाब, दस्तावेज भी तलब
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की क्षेत्रीय अधिकारी एवं वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता निधि खंडेलवाल द्वारा जारी नोटिस में कंपनी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निर्माण कार्य रुक सकता है, बिजली-पानी कनेक्शन भी कट सकते हैं
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि जवाब असंतोषजनक पाए जाने या नियमों का पालन नहीं होने की स्थिति में—
-परियोजना स्थल पर निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रुकवाया जा सकता है।
-निर्माण स्थल के व्यावसायिक बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जा सकते हैं।
-पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
विशेषज्ञों की राय: बाद में आवेदन करने से भी नहीं मिलेगा राहत
पर्यावरण मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि नोटिस जारी होने के बाद कंपनी आवश्यक सहमतियों के लिए आवेदन भी करती है, तब भी पूर्व अनुमति के बिना किए गए निर्माण कार्य पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की संभावना बनी रहेगी।
मामले पर आगे रहेगी नजर
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी निर्धारित समय सीमा में बोर्ड को क्या जवाब देती है और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है। मामला पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन और शहरी विकास परियोजनाओं में नियामकीय पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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