Siddaramaiah: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आज(26 जुलाई) चुनावी राजनीति से संन्यास का ऐलान किया है. जिसने कर्नाटक के सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. सिद्धारमैया ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर साफ शब्दों में लिखा कि वो 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे.
ರಾಜಕೀಯ ಕ್ಷೇತ್ರ ಇಂದು ಕಲುಷಿತಗೊಂಡಿರುವುದರಿಂದ 2028ರ ವಿಧಾನಸಭಾ ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ನಾನು ಸ್ಪರ್ಧಿಸುವುದಿಲ್ಲ. ಆದರೆ, ಸಕ್ರಿಯ ರಾಜಕಾರಣದಲ್ಲಿದ್ದು, ಜನರ ಕಷ್ಟ, ಸುಖಗಳಿಗೆ ಧ್ವನಿಯಾಗಿ ನಿಲ್ಲುತ್ತೇನೆ.
ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ಸ್ಪರ್ಧಿಸುವಂತೆ ವರುಣ ಕ್ಷೇತ್ರದ ಜನರು ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಆದರೆ ನಾನು ಇನ್ನು ಮುಂದೆ ಯಾವುದೇ… pic.twitter.com/v0S4tCQ30o
— Siddaramaiah (@siddaramaiah) July 26, 2026
सिद्धारमैया ने पोस्ट में क्या लिखा?
सिद्धारमैया ने X पोस्ट में लिखा कि आज राजनीति का क्षेत्र पूरी तरह भ्रष्ट हो चुका है. इसलिए मैं 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा. हालांकि, राजनीति में सक्रिय रहकर जनता के सुख-दुख की आवाज़ बनकर काम करता रहूंगा. वरुणा विधानसभा क्षेत्र के लोग एक बार फिर मुझ पर चुनाव लड़ने का दबाव बना रहे हैं. लेकिन मैंने तय कर लिया है कि अब आगे से मैं कोई भी चुनाव नहीं लड़ूंगा. पहले जब मैं चुनाव लड़ता था, तब क्षेत्र की जनता ही हमें चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक सहयोग देती थी और हमें जिताती थी. लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.
पोस्ट में आगे लिखा कि आज मेरी उम्र 79 वर्ष है. हमारी सरकार का कार्यकाल अभी डेढ़ वर्ष और बाकी है. तब तक मेरी उम्र 81-82 वर्ष हो जाएगी. अब मेरा स्वास्थ्य पहले जैसा नहीं रहा और न ही पहले जैसी ऊर्जा के साथ काम कर पाना संभव है. साल 2028 तक मेरी उम्र 82 वर्ष होगी और तब मेरे राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष पूरे हो जाएंगे. मैंने वर्ष 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी. इस लंबे सफर में मैंने हार भी देखी और जीत भी. लेकिन मुझे इस बात का संतोष है कि मैंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और न ही अपनी अंतरात्मा के खिलाफ कोई काम किया. अब ऐसा समय आ गया है कि चुनाव लड़ने के लिए नेताओं को जनता को पैसे देने पड़ते हैं. आज की राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है. ईमानदार राजनीति के लिए अब कोई जगह बचती हुई दिखाई नहीं देती. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मैंने भविष्य में कोई चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है. पिछले 5 दशकों से राज्य की जनता ने मुझे अपने परिवार के सदस्य की तरह अपनाया, स्नेह दिया और मेरा मार्गदर्शन किया. मैं इस ऋण को कभी नहीं चुका सकता. इसलिए अपने जीवन का शेष समय भी मैं पूरी तरह जनसेवा के लिए समर्पित करूंगा.
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