Swami Avimukteshwaranand: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर निकाली जा रही गौरक्षक धर्म युद्ध यात्रा अयोध्या पहुंच चुकी है. इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि अगर पार्टियां कोई नहीं आईं, जैसा कि दो साल पहले ही हम हर पार्टी के दरवाजे भी जा चुके हैं और जा करके उनसे पूछ चुके हैं कि आप बताइए गाय के पक्ष में हैं. क्योंकि आप लोग गोल-गोल बात करते हैं. गाय के साथ फोटो भी खिंचवाते हैं, आरती-पूजा करते हैं, गुड़ खिलाते हैं और आंकड़ा भी दिखाई देता है कि गाय के बारे में बहुत बुरा बर्ताव है आपका, तो ये गोल-गोल नहीं चलेगा. अब साफ होना पड़ेगा. एक बीच में लाइन खिंचेगी, जैसे युद्ध में खिंचती है. इसलिए हमने इसको धर्म युद्ध नाम दिया है. युद्ध में यही होता है कि लाइन खिंच जाती है.
“युद्ध तो अवश्यंभावी है”
शंकराचार्य ने आगे कहा कि एक विचारधारा के लोग एक तरफ और दूसरी, अपोजिट विचारधारा के लोग दूसरी तरफ होते हैं. तो अब गाय को पूजने वाले, चाहने वाले और गाय को काट के खाने और बेचने वाले, इन दोनों के बीच का युद्ध होगा. तो जिसको अपना पाला तय करना हो, तय कर ले कि कौन किधर रहेगा. युद्ध तो अवश्यंभावी है.
“गौ रक्षा हमारा प्रथम कर्तव्य है”
उन्होंने कहा कि ऐसा है कि गौ माता की रक्षा हिंदू जनता का सपना है. गौ रक्षा हमारा प्रथम कर्तव्य है. 100 करोड़ से ज्यादा जिस देश में हिंदू रहते हों, उस देश में गाय मारी-मारी फिरे और काटी और बेची जाए, ये बिल्कुल असहय है. देश की जनता ने भारत की सरकार पर भरोसा किया. नेताओं के वचन पर भरोसा किया और प्रतीक्षा करती रही कि अब करेंगे, अब करेंगे. आजादी के पहले हमसे वादा किया गया था इतिहास में दर्ज है कि आजादी हो जाने दीजिए, स्वराज स्थापित हो जाए, कलम की पहली नोक से सरकार बनते ही गौ माता की रक्षा का कानून भारत में बना दिया जाएगा. लेकिन 78 साल हो चुके हैं.
“आज तक गौ माता की रक्षा का कानून नहीं बना”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आज तक गौ माता की रक्षा का कानून नहीं बना…नेताओं से, पार्टियों से जब हमारा भरोसा उठ गया, तब हमने सनातनी जनता की ओर से, गौभक्त जनता की ओर से, मतदाताओं से संवाद करने का रास्ता अपनाया है. इसलिए हम उत्तर प्रदेश में विधान सभा, विधान सभा गए हैं. अभी भी जा ही रहे हैं और लगभग 400 के करीब विधान सभा क्षेत्रों में होते हुए अब हम अयोध्या आए हैं. यहां जो मतदाता जनता है उससे संवाद करेंगे और उनको गौ माता की रक्षा के लिए वोट करने का प्रण करवाएंगे.
“सीढियों पर कभी नमाज पढ़ी ही नहीं गई”
राम मंदिर दान मामले पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि मुख्यमंत्री की SIT पर भरोसा करें, हमें कोई बाधा नहीं है. हम एक बात पूछते हैं, यही मुख्यमंत्री है न? जो अयोध्या आया था चोरी की घटना के बाद और आप लोगों के कैमरे के सामने वक्तव्य दिया था कि “दूध का दूध और पानी का पानी कर दूंगा, मैंने SIT बना दी है.” कहा था कि नहीं कहा था? आप लोगों ने खूब फैलाया कि “दूध का दूध, पानी का पानी. तो जब ये दुबारा आया अयोध्या में, ये मुख्यमंत्री, तो इसको एक हाथ में दूध की बोतल और एक हाथ में पानी की बोतल लेकर आना चाहिए था न? दिखाना चाहिए था न आपके कैमरे के सामने कि “ये देखिए ये दूध का दूध और ये देखिए ये पानी का पानी. लेकिन जब ये दुबारा आया तो इसको डर था कि लोग पूछेंगे कि “दूध का दूध और पानी का पानी का क्या हुआ. तो इसने झूठ गढ़ी, ’27 साल पहले की हमारे हनुमानगढ़ी की सीढियों पर नमाज पढ़ाई गई थी. बताइए, 27 पहले के नमाज का झूठ, क्योंकि सीढियों पर पर कभी नमाज पढ़ी ही नहीं गई, सब जानते हैं…इस मुख्यमंत्री को, कि अगर हम कुछ राजनीतिक रूप से गढ़ के कहानी नहीं ले जाएंगे, वहां पर शगुफा नहीं छोड़ेंगे, तो लोग हमसे पूछेंगे कि “दूध का दूध, पानी का पानी क्या हुआ,तो हम क्या जवाब देंगे.तो इसलिए इन्होंने “दूध का दूध, पानी का पानी” करने का जो समय था उसमें इन्होंने एक राजनीतिक वक्तव्य गढ़ दिया और गढ़ करके उसको चला दिया. इसका मतलब क्या है? इसका मतलब है कि ये चोरों को बचा रहा है. अगर चोरों को ना बचाते होते तो दूसरी कोई बात ना करके उसी की बात करते, उसी का जवाब देते, प्रगति बताते अपनी कि अभी तक मैंने ये कर दिया.
“राम जी का फोटो दिखा दो”
उन्होंने कहा कि कोई चीजें ऐसी होती हैं जो इंडिविजुअल कैपेसिटी की होती हैं और कोई-कोई ऐसी चीजें होती हैं जो सामूहिक होती हैं. टीम वर्क जिसको कहते हैं. जैसे सेना में अगर परेड हो रही है, NCC की परेड हो रही है, तो उसमें अगर 30 लड़के कैडेट शामिल हैं और एक गड़बड़ कर देगा तो सब फेल हो जाएंगे, वो टीम वर्क है. उसमें किसी एक व्यक्ति को केवल नहीं निकाला जाएगा. किस पीस को हटा दो, खत्म करो. जो अच्छे प्रोडक्ट होते हैं, उनमें अगर एक पुर्जा खराब हो, तो पूरा प्रोडक्ट हटा दिया जाता है… तो जब आपकी एक टीम चोर निकल गई, तो अब आप किसी एक पुर्जें को क्यों हटाते हो, ट्रस्ट को भंग करो और एक ऐसा ट्रस्ट स्थापित करो, जिस पर पूरे देश को भरोसा हो जाए. धर्माचार्यों का ट्रस्ट स्थापित करो, ये जगह धर्माचार्यों का है. ये गलत है कि जिन्होंने मुकदमे में भागीदरी नहीं की… जिस RSS के कार्यालय में आज तक राम जी का फोटो नहीं लग सका, वो हमारे राम मंदिर का प्रबंधन करने के लिए बैठा हुआ है, इससे बढ़कर हम हिंदुओं के लिए पीड़ा की बात क्या होगी? RSS के किसी कर्यालय में राम जी का फोटो दिखा दो, नहीं दिखा सकोगे, क्योंकि वो लगाते ही नहीं हैं.
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