Gold-Silver : सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद मजबूत अमेरिकी डॉलर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने कीमती मेटल्स पर दबाव बनाया है। कॉमेक्स पर सोना 4,100 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी में भी करीब 2 प्रतिशत की गिरावट रही. एमसीएक्स पर भी सोना और चांदी दोनों कमजोर रहे. बाजार की नजर अब अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों पर बनी हुई है।
सोना-चांदी में गिरावट क्यों आई?
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल हुआ, जिससे महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ी। .अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिससे दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो गया। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़ी, जिससे बिना ब्याज वाले निवेश जैसे सोने का आकर्षण कम हुआ है। चांदी पर अतिरिक्त दबाव इसलिए आया क्योंकि यह कीमती मेटल होने के साथ-साथ औद्योगिक मेटल भी है।
कॉमेक्स पर सोना और चांदी फिसले
एशियाई कारोबार के दौरान कॉमेक्स पर सोना 30.60 डॉलर यानी 0.74 प्रतिशत गिरकर 4,083.10 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं एमसीएक्स पर चांदी 1.12 डॉलर यानी 1.86 प्रतिशत टूटकर 59.045 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
गिरावट की वजह क्या रही
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान द्वारा होमुर्ज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा के बाद भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया. इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 78 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। इससे महंगाई बढ़ने और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की चिंता बढ़ी।
मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड का असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़ी और अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ। मजबूत डॉलर की वजह से अन्य देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है. वहीं ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने को रखने की लागत बढ़ जाती ह। शुरुआती कारोबार में इन दोनों वजहों का असर सुरक्षित निवेश की मांग से ज्यादा रहा।
अब किन आंकड़ों पर रहेगी नजर
निवेशक अब अमेरिका के उपभोक्ता महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकें। इसके अलावा इस सप्ताह अमेरिकी रिटेल सेल्स, हाउसिंग डेटा और साप्ताहिक बेरोजगारी दावों के आंकड़ों पर भी बाजार की नजर रहेगी।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर भी नजर
रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार अमेरिका और ईरान के बीच जारी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. अगर तनाव और बढ़ता है तथा कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो इससे महंगाई की चिंता बढ़ सकती है और अमेरिकी डॉलर व बॉन्ड यील्ड को समर्थन मिल सकता है. वहीं अगर भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ती है, तो जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर निवेशक फिर से सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर सकते हैं. फिलहाल कीमती धातुओं की कीमतों पर ये दोनों विपरीत कारक असर डाल रहे हैं।
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