Khamei funeral : ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को आखिरी विदाई देने के लिए शनिवार को लाखों लोगों ने तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में मातम मनाया। शिया परंपरा के मुताबिक काले कपड़े पहने लोग छाती पीटकर मातम मनाते दिखे। इस दौरान लोगों ने ‘खून बहेगा’, ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘बदला, बदला’ जैसे नारे भी लगाए। तेहरान में 3 जुलाई से खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में शुरू हो गई हैं जो 9 जुलाई तक चलेगी। खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे देशों के टॉप लीडर्स शामिल नहीं हुए हैं। ईरान की तरफ से न्योता भेजे जाने के बावजूद इन्होंने अपने निचले स्तर के प्रतिनिधियों को भेजा।
ईरान को एक हफ्ते की छुट्टी – अमेरिका
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ने खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए ईरान को एक हफ्ते की छुट्टी दी है। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने मानवता के नाते ऐसा किया है। कार्यक्रम खत्म होने के तुरंत बाद ईरान को अमेरिकी शर्तें माननी होंगी।
खामेनेई की मौत का बदला लेंगे
ईरान के खुफिया मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि अमेरिका-इजराइल के हमलों में मारे गए खामेनेई और दूसरे लोगों की मौत का बदला लिया जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि हमारे जख्म तब तक नहीं भरेंगे जब तक हत्या के जिम्मेदार लोगों से बदला नहीं लिया जाता।
खामेनई का अंतिम संस्कार या फिर शक्ति प्रदर्शन?
3 से 9 जुलाई तक चलने वाला अंतिम संस्कार सिर्फ एक शोक सभा नहीं, बल्कि ईरान का एक शक्ति प्रदर्शन भी है। इसमें करीब 2 करोड़ लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। इसमें 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट का कहना है कि सड़कों पर लाखों-करोड़ों लोगों की भीड़ जुटाकर ईरान दुनिया को संदेश दे रहा है कि उसकी शासन व्यवस्था और श्इस्लामिक क्रांतिश् आज भी पूरी तरह मजबूत है।
संस्कार के लिए मुहर्रम का महीना क्यों चुना गया
शिया इस्लाम में यह महीना शोक और शहादत से गहराई से जुड़ा है। 7वीं सदी में इमाम हुसैन की शहादत इसी महीने में हुई थी, जो शिया धर्म में बेहद अहम दर्जा रखते हैं। खामेनेई का वंश उनसे जुड़ा माना जाता है।
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