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ईरान में अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुरू, मासूम पोती का शव भी रखा, रो पड़े राष्ट्रपति

Khamnei funeral

Khamnei : ईरान की राजधानी तेहरान में पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों की अंतिम विदाई की रस्में शुरू हो गई हैं। खामेनेई के साथ उनकी 14 महीने की पोती, पत्नी, बेटी और दामाद को भी श्रद्धांजलि दी जा रही है। खामेनेई की पोती के छोटे से ताबूत के पास उसकी तस्वीर भी रखी गई है।

राष्ट्रपति और इरानी सांसद रो पड़े

तेहरान के मोसल्ला मस्जिद परिसर में अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों के ताबूत रखे गए हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान समेत देश का शीर्ष नेतृत्व तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचा। इस दौरान पजशकियान भावुक होकर रो पड़े। उनके साथ मौजूद कई ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और कई सैन्य अधिकारी भी अपने आंसू नहीं रोक सके। खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों को 9 जुलाई को मशहद शहर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

अंतिम यात्रा 5 शहरों से गुजरेगी

तेहरानरू सत्ता का केंद्र

अंतिम दर्शन की शुरुआत तेहरान के मस्जिद ग्रैंड मोसल्ला से होगी। यहां बड़े धार्मिक कार्यक्रम, सरकारी समारोह और शुक्रवार की नमाज होती है। तेहरान में सत्ता के सारे बड़े केंद्र, जैसे- राष्ट्रपति भवन, संसद, न्यायपालिका और सेना के मुख्यालय हैं।

कोम -शिया धर्म की पढ़ाई का सबसे बड़ा केंद्र

कोम ईरान का सबसे बड़ा धार्मिक शिक्षा केंद्र है। यहां शिया धर्म के बड़े-बड़े मदरसे हैं, जहां से कई बड़े धर्मगुरु निकले हैं। यहां मौजूद फातिमा मासूमा की दरगाह भी शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र स्थलों में गिनी जाती है। खामेनेई की यात्रा यहां से गुजरना उनके धार्मिक नेतृत्व का सम्मान माना जा रहा है।

करबला – शहादत का प्रतीक

इराक का करबला शहर शिया मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। यहां इमाम हुसैन की दरगाह है। इमाम हुसैन की शहादत शिया इतिहास की सबसे बड़ी घटना मानी जाती है। इसलिए करबला में होने वाला कार्यक्रम खामेनेई के बलिदान, संघर्ष और धैर्य का संदेश देगा।

नजफ -शिया धर्म का बड़ा केंद्र

इराक का नजफ शहर इमाम अली की दरगाह के लिए फेमस है। यह दुनिया में शिया धर्म की पढ़ाई और धर्मगुरुओं का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां अंतिम श्रद्धांजलि देने का मकसद यह दिखाना है कि खामेनेई का प्रभाव सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरी शिया दुनिया में था।

मशहद – अंतिम संस्कार यहीं होगा

अंतिम पड़ाव ईरान का सबसे पवित्र शहर मशहद होगा। यहां इमाम रजा की दरगाह है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। खामेनेई का जन्म भी मशहद में हुआ था और उनका बचपन यहीं बीता। इसलिए उन्हें इसी शहर में दफनाया जाएगा।

खामेनेई के साथ 14 महीने की पोती का ताबूत

ईरान में अली खामेनेई के साथ जिन लोगों को श्रद्धांजलि दी जा रही है, उनमें उनके एक दामाद, उनकी सबसे बड़ी बेटी, 14 महीने की पोती और ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की पत्नी शामिल थीं। 14 महीने की बच्ची जहरा मोहम्मदी गोलपायेगानी का छोटा सा ताबूत अली खामेनेई के ताबूत के बगल में रखा हुआ है। ताबूत के बगल में ही बच्ची की तस्वीर रखी हुई है।

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