Iran-India : ईरान की राजधानी तेहरान में 4 से 9 जुलाई के बीच सुप्रीम लीडर रहे अली खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार में भारत की ओर से पीएम मोदी शामिल नहीं होंगे उनकी जगह भारत ने विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को प्रतिनिधिमंडल में भेजने का फैसला किया है। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या भारत ने ईरान को लेकर अपना रुख बदल लिया है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2024 में जब ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलिकॉप्टर हादसे में मौत हुई थी, तब भारत की ओर से उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अंतिम संस्कार में गए थे। लेकिन इस बार ईरान के सबसे बड़े नेता के अंतिम संस्कार में जूनियर स्तर का डेलिगेशन भेजा जा रहा है।
फैसले को लेकर चर्चा
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ लोगों का मानना है कि भारत ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि अमेरिका और इजराइल के साथ उसके रिश्तों पर असर न पड़े। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इजराइल, यूएई और अमेरिका के साथ भी अपने संबंध काफी मजबूत किए हैं। कुछ एक्सपर्ट इस फैसले को भारत की नीति में बदलाव नहीं मानते। उनके मुताबिक 1989 में जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी का निधन हुआ था, तब भी भारत की ओर से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति नहीं गए थे। उस समय तत्कालीन विदेश मंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
पेट्रोल सस्ता करे कंपनियां
इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों से तुरंत पेट्रोल के दाम घटाने को कहा है। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि कच्चे तेल की कीमत घटकर 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, लेकिन इसका फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंच रहा। उन्होंने कहा कि लोग अब भी जरूरत से ज्यादा कीमत चुका रहे हैं, जबकि तेल लगातार सस्ता हो रहा है। उन्होंने कंपनियों से पेट्रोल की कीमत करीब 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाने की अपील की। ट्रम्प ने कहा कि ग्राहकों से जरूरत से ज्यादा पैसे वसूलना गैरकानूनी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कंपनियों ने जल्द दाम नहीं घटाए तो उन्हें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इससे पहले ट्रम्प अमेरिकी न्याय विभाग को बड़ी तेल कंपनियों की जांच के आदेश भी दे चुके हैं।
अमेरिकी दूत पहुंचे, लेकिन ईरान से बातचीत नहीं
कतर ने कहा है कि अमेरिका के विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ दोहा पहुंचे हैं। लेकिन उनकी ईरानी अधिकारियों से आमने-सामने कोई बातचीत नहीं होगी। दोनों अमेरिकी प्रतिनिधि कतर के अधिकारियों से मिलेंगे। उनके जरिए अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।कतर ने यह भी कहा कि वहां जमा ईरान के 6 अरब डॉलर अभी तक तेहरान को नहीं भेजे गए हैं।
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