CBSE : दिल्ली हाईकोर्ट ने NSUI की उस मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें CBSE के रिवेल्यूएशन पोर्टल को दोबारा खोलने का आदेश देने की मांग की गई थी जिससे देशभर के उन छात्रों को राहत मिल सके जिन्होने पोर्टल पर अपने आवेदन नहीं कर पाए थे। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं कक्षा की ऑन स्क्रीन मार्किंग मामले में स्टूडेंट्स को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने सीबीएसई के पुनर्मूल्यांकन (रिवैल्यूएशन) पोर्टल को फिर से खोलने का कोई भी निर्देश देने से साफ इनकार कर दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में नियमित रोस्टर बेंच के सामने होगी।
70 लाख छात्रों के एडमिशन पर असर
कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीएसई का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि 1.27 लाख असंतुष्ट स्टूडेंट्स पहले ही ब्ठैम् पोर्टल के जरिए संपर्क कर चुके हैं। एसजी मेहता ने दलील दी कि यदि अदालत रिवैल्यूएशन पोर्टल को दोबारा खोलने का आदेश देती है तो इसका सीधा असर परीक्षा में शामिल हुए 70 लाख से अधिक स्टूडेंट्स पर पड़ेगा। इससे अंडर ग्रेजुएट कोर्सेज में उनके दाखिले की प्रक्रिया और अवसरों में भारी देरी हो जाएगी।
NSUI ने दाखिल की थी याचिका
आपको बता दें कि नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया यानी एनएसयूआई ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। छात्र संगठन एनएसयूआई ने एक जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका में स्टूडेंट्स को मुआवजा अंक (कंपेंसेटरी मार्क्स) देने और रिवैल्यूएशन पोर्टल को एक महीने के लिए फिर से खोलने का निर्देश देने की मांग की गई थी। लेकिन कोर्ट के मौजूदा फैसले से एनएसयूआई और स्टूडेंट्स को बड़ा झटका लगा है।
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