Firecracker factory: राजस्थान की राजधानी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में आग मामले में बुधवार सुबह खोह नागोरियान थाने के एएसआई अमर सिंह और हेड कॉन्स्टेबल पप्पू राम को सस्पेंड किया गया है। इन पर लापरवाही के आरोप हैं। जावेद विहार में तीन सहित अब तक 5 फैक्ट्री-गोदाम सील किए गए हैं। बताते दें कि जयपुर के रिहायशी और घनी आबादी वाले खोह नागोरियान में मंगलवार को अवैध पटाखा फैक्ट्री के गोदाम में हुए अग्निकांड में 8 लोगों की मौत हो गई। हादसे को लेकर पुलिस-प्रशासन पर भी लापरवाही के आरोप लगे हैं।
घरों में की जा रही छापेमारी
जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात से ही पुलिस इलाके में मौजूद दूसरी फैक्ट्री-गोदामों पर छापेमारी कर रही है। जानकारी के मुताबिक रेड में 3 फैक्ट्री-गोदामों से भारी मात्रा में बारूद भी मिला है। ये अवैध तरीके से स्टोर किया गया था। अब तक 5 फैक्ट्री-गोदाम सील किए गए हैं। अवैध फैक्ट्री-गोदामों के साथ आयशा कॉलोनी के कई घरों में पुलिस ने छापेमारी की है। इन घरों में पटाखे बनाए जा रहे थे। रात से चल रही इस कार्रवाई में अब तक किसी को पकड़ा नहीं गया है।
क्या है मामला
9 जून की सुबह करीब 11 बजे खोह नागोरियान में अवैध पटाखा फैक्ट्री में आग लगी थी, जिसमें एक बच्चे और दो भाइयों समेत कुल 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। यह मकान (नंबर- 88, करीम नगर-बी) याकूब पुत्र नजीर खान (निवासी- राक्ष्या की ढाणी, खोह नागोरियान) का है। हादसे के बाद से ही मकान मालिक याकूब और फैक्ट्री संचालक फिरोज फरार हैं। ये अवैध फैक्ट्री दिल्ली का रहने वाला फिरोज चला रहा था।
फैक्ट्री के बाहर ज्वलनशील पाउडर मिला
तमिलनाडु से आए एल्युमिनियम मेटल पाउडर का एक कार्टन (डिब्बा) फैक्ट्री के बाहर रखा हुआ दिखा। इस पर वजन करीब 20 किलो लिखा है। यह पाउडर अत्यधिक ज्वलनशील है।
सालभर पहले भी लगी थी आग
जावेद विहार में जहां तीन फैक्ट्री सील की गई हैं, वहीं पास बने मकान में रहने वाले युवक अरमान मलिक ने बताया- मैं इस घर में पिछले 4 साल से परिवार के साथ रह रहा हूं। मेरे घर के पास अवैध फैक्ट्री में करीब 2 साल से पटाखे बनाने का काम चल रहा है। यहां पर पटाखे बनाने का काम दरवाजा बंद करके और ताला लगाकर किया जाता था। युवक ने बताया- सालभर पहले भी यहां एक पटाखा फैक्ट्री में आग लगी थी। इसकी पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। युवक ने बताया कि इन फैक्ट्रियों के पास किसी तरह का लाइसेंस भी नहीं होता। बारूद के ढेर के पास घर होने के कारण जान का खतरा रहता है।
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