Acne: आज के दौर में खराब जीवनशैली और खानपान की वजह से अक्सर चेहरे पर कील-मुंहासे निकल आते हैं। वैसे तो बाजार में मुंहासो की दवा, चेहरा साफ़ करने की दवाओं आदि के नाम पर कई प्रोडक्ट बिक रहे हैं लेकिन बेहतर होगा कि इन्हें अपनाने की बजाय आप मुंहासे हटाने और चेहरा साफ करने के आयुर्वेदिक घरेलू उपाय अपनाएं।
क्यों होते हैं मुहांसे
आयुर्वेद चिकित्सक के अनुसार आमतौर पर जब हमारी त्वचा पर मौजूद तेल ग्रन्थियां बैक्टिरीया से संक्रमित हो जाती हैं तो मुँहासों का जन्म होता है। हमारे शरीर में हथेलियों और तलवों को छोड़कर ये तेल ग्रन्थियां पूरे शरीर की त्वचा पर मौजूद होती हैं। त्वचा के रोम छिद्र भीतर से ही इन तेल ग्रन्थियों वाली कोशिकाओं से जुड़े होते हैं। यही रोम छिद्र सीबम पैदा करते हैं, जो त्वचा की खूबसूरती और उसके भीतर तेल संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। जब हमारे शरीर में हार्माेनल बदलाव होता है, तो हमारी त्वचा की तेल ग्रन्थियों में तेल संतुलन बिगड़ जाता है। इस संतुलन के बिगड़ने की वजह से ही हमारी त्वचा पर मुँहासे नजर आने लगते हैं।
मुँहासा क्या है?
मुँहासे (ंबदम) त्वचा की एक आम समस्या है। कील-मुँहासे ज्यादातर हार्माेनल बदलावों या खान-पान की गड़बड़ी के कारण निकलते हैं। कुछ आहार ऐसे होते हैं जिनको खाने से आपकी त्वचा खराब हो जाती है और कील मुँहासों की समस्याएं शुरु हो जाती हैं। व्यक्ति का स्वास्थ्य वात, पित्त, कफ पर निर्भर करता है। ऐसे में पित्त और कफ के अधिक बढ़ जाने पर मुँहासे की समस्या होने लगती है। मुँहासों की समस्या चेहरे पर अधिकतर देखी जाती है, परन्तु चेहरे के साथ-साथ यह एक्ने पीठ और कंधों पर भी निकलती है। विशेष रूप से चेहरे और पीठ पर एक्ने ज्यादा निकलते हैं। शरीर की हथेलियों और तलवों पर यह कभी नहीं होती।
यह लगभग 14 वर्ष से शुरु होकर 30 वर्ष तक कभी भी निकल सकते हैं। ये निकलते समय तकलीफ दायक होते हैं और बाद में भी इसके दाग-धब्बे चेहरे पर रह जाते हैं।
मुँहासे अनेक प्रकार के होते हैं-
पेपुल्यस –ये गुलाबी रंग के ठोस दाने होते हैं, जिनकी वजह से कभी-कभी दर्द भी होता है।
फुँसी या दाना – ये छोटे दाने होते हैं।
नोड्यूल्स -ये त्वचा पर थोड़ी गहराई में निकलते हैं। इनका आकार बड़ा होता है और इनकी वजह से दर्द भी होता है।
सिस्ट –ये त्वचा पर ज्यादा गहराई में निकलते हैं और इनकी वजह से दर्द भी हो सकता है। कईं बार ये ठीक होने के बाद त्वचा पर दाग छोड़ देते हैं।
व्हाइटहेड्स- ये बहुत छोटे होते हैं और आमतौर पर त्वचा के नीचे मौजूद होते हैं।
ब्लैकहेड्स- यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। वे रंग में काले और त्वचा की सतह पर दिखते हैं।
मुँहासे क्यों निकलते हैं?
आयुर्वेद के अनुसार शरीर में पित्त और कफ की अधिकता होने के कारण एक्ने निकलने लगते हैं। एक्ने निकलने के कुछ ऐसे कारणों के बारे में बतायेंगे जिसको सुनकर आप आश्चर्य में पड़ जायेंगे।
-पिंपल/एक्ने की समस्या अनुवांशिक हो सकती है। अगर आपके परिवार में किसी को बार-बार पिंपल होते हैं तो आपको भी एक्ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
-बढ़ती उम्र के साथ शरीर में होने वाले हार्माेनल बदलावों की वजह से भी एक्ने होते हैं। खासकर महिलाओं को मासिक धर्म, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के समय शरीर में होने वाले हार्माेनल बदलावों के कारण भी एक्ने हो सकते हैं।
-कभी-कभी तनाव, मिर्गी या मानसिक बीमारी से जुड़ी कुछ दवाओं के सेवन से भी एक्ने निकल सकते हैं।
-कॉस्मेटिक यानी सौंदर्य प्रसाधनों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से एक्ने निकल सकते हैं। कई बार महिलाएं पूरे दिन मेकअप में रहती हैं और रात को ठीक से मेकअप नहीं उतारती हैं। इस वजह से भी पिंपल हो सकते हैं। इसलिए महिलाओं को हल्का मेकअप करने और नेचुरल ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
-बेकरी के खाद्य पदार्थ और हाई शुगर वाले ड्रिंक्स का सेवन करने से भी एक्ने होते हैं। इसके अलावा डेयरी प्रोडक्ट, ऑयली चीजें और जंक फूड़ के ज्यादा सेवन से भी एक्ने हो सकते हैं।
-ज्यादा समय तक स्ट्रेस में रहने से भी एक्ने की परेशानी हो सकती है। जब आप तनाव में होते हैं तो आपके शरीर के अन्दर कुछ बदलाव होते हैं जिस कारण मुँहासे होते है। दरअसल, तनाव से न्यूरोपैट्राइड्स नाम रसायन निकलता है जिससे तनाव और भी बढ़ सकता है।
-ज्यादा समय तक धूल-मिट्टी और प्रदूषित वातावरण में रहने से एक्ने होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, अगर आप एक शहर से दूसरे शहर तक ज्यादा आना-जाना करते हैं तो बदलते मौसम के कारण भी आपको एक्ने हो सकते हैं।
-फैट ग्रन्थियों से जो स्राव निकलता है वह रूक जाता है। यह स्राव त्वचा को मुलायम रखने के लिए रोम छिद्रों से निकलता रहता है। यदि यह रुक जाए तो फुँसी के रूप में त्वचा के नीचे इकट्ठा हो जाता है और कठोर हो जाने पर मुँहासा बन जाता है। इसे ‘एक्ने वल्गेरिस’ कहते हैं। इसमें पस पड़ जाए तो इसे कील यानी पिम्पल कहते हैं और पस निकल जाने पर ही यह ठीक हो जाते हैं।
मुंहासो के लक्षण
मुँहासे या एक्ने फूंसी का ही एक रूप होते हैं, लेकिन इसके अलावा और भी लक्षण-संकेत होते हैं।
-व्हाइटहेड्स
-ब्लैकहेड्स
-छोटे लाल, टेंडर बम्प
कभी-कभी महिलाओं को मुँहासे आने लगते हैं, वजन बढ़ने लगता है, बाल झड़कर पतले हो जाते हैं। लेकिन यह लक्षण सामान्य लगने के बावजूद आपके माँ न बन पाने के भी लक्षण हो सकते हैं। इसलिए समय से पहले इन संकेतों पर ध्यान दें और बांझपन होने से पहले संभाल लें। आमतौर पर पॉलिसिस्टिक ऑवरी सिंड्रोम (पी.सी.ओ.एस) भारतीय जनन आयु की महिलाओं में अंतस्रावी विकारों में एक ऐसा विकार है, जिससे बांझपन होता है। यदि कोई महिला दर्दनाक अनियमित मासिक धर्म या मुँहासे से ग्रस्त है उसका वजन बढ़ रहा है तो समझिए वह पी.सी.ओ.एस. नामक हार्माेन असंतुलन से गुजर रही है।
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