Narendra Modi: नरेंद्र मोदी ने आज 10 जून को देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. आज उनके कार्यकाल के 4399 दिन यानि 12 साल पूरे हो गए हैं. अब वो सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं. सत्ता संभालने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए. 12 वर्षों के इस सफर में मोदी सरकार ने एक ओर जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं के जरिए आम लोगों तक सीधे लाभ पहुंचाने पर जोर दिया, तो दूसरी ओर अनुच्छेद 370 हटाने, जीएसटी लागू करने और आत्मनिर्भर भारत जैसे फैसलों से राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ी.गांव से शहर तक, बैंकिंग से टेक्नोलॉजी तक और विदेश नीति से सुरक्षा तक, इन 12 सालों में कई ऐसे फैसले लिए गए जिन्होंने देश की दिशा और राजनीति दोनों को गहराई से प्रभावित किया.
नोटबंदी का बड़ा फैसला: 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का ऐलान किया. सरकार ने इसे काले धन, भ्रष्टाचार और नकली नोटों के खिलाफ बड़ा कदम बताया. नोटबंदी के दौरान देशभर में लंबी कतारें देखने को मिलीं और विपक्ष ने इसकी आर्थिक असर को लेकर आलोचना भी की.
सेना का पराक्रम और सर्जिकल स्ट्राइक: मोदी सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई. उरी हमले के बाद भारतीय सेना ने 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकियों के ठिकाने तबाह किए. पुलवामा हमले के बाद 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक की गई. इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भी आतंकियों को निशाना बनाया गया. इन कार्रवाइयों ने दुनिया को भारत की सैन्य ताकत दिखाई.
GST: 1 जुलाई 2017 को मोदी सरकार ने देशभर में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया. इसके जरिए कई अप्रत्यक्ष करों को खत्म कर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ व्यवस्था लागू की गई. इसे आजादी के बाद टैक्स सिस्टम का सबसे बड़ा सुधार माना गया. शुरुआती दिक्कतों के बावजूद आज जीएसटी कलेक्शन लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है, हालांकि विपक्ष इसकी आलोचना करता रहा है.
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किया: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया. इसके साथ ही राज्य का विशेष दर्जा खत्म कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को 2 केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा गया. इस फैसले ने घाटी की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया.
सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण: मोदी सरकार ने 2019 में आर्थिक आधार पर सवर्ण वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया. लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद इस विधेयक को संसद से पास कराया गया. इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग को सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिल रहा है.
3 तलाक पर कानून: मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से राहत दिलाने के लिए ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम’ लागू किया. इसके तहत एक बार में तीन तलाक देना गैरकानूनी और दंडनीय अपराध बना दिया गया. सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे निजी कानूनों में हस्तक्षेप करार दिया.
महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण: मोदी सरकार ने संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पास कराकर नया इतिहास रचा. इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया. इसे भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है.
अग्निवीर योजना लागू: भारतीय सेनाओं को युवा और आधुनिक बनाने के लिए मोदी सरकार ‘अग्निपथ योजना’ लेकर आई. इस योजना के तहत युवाओं को 4 साल तक ‘अग्निवीर’ के रूप में सेना में सेवा का मौका दिया गया. योजना को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए और विपक्ष ने भी सरकार को घेरा. इसके बावजूद सरकार ने इसे सेना में बड़ा सुधार बताया.
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया. सरकार ने ट्रस्ट बनाकर मंदिर निर्माण प्रक्रिया को गति दी. 22 जनवरी 2024 को भव्य राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए. इसे बीजेपी के सांस्कृतिक एजेंडे की बड़ी उपलब्धि माना गया.
नागरिकता संशोधन कानून (CAA): मोदी सरकार ने 2019 में नागरिकता संशोधन कानून लागू किया. इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया. इस कानून को लेकर देशभर में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए और शाहीन बाग आंदोलन चर्चा में रहा. विरोध के बावजूद सरकार ने इसे लागू करने का फैसला कायम रखा.
डिजिटल इंडिया और जनधन योजना: 2015 में शुरू हुए डिजिटल इंडिया अभियान और JAM ट्रिनिटी ने देश में डिजिटल क्रांति ला दी. आज छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक यूपीआई का इस्तेमाल हो रहा है. वहीं, 2014 में शुरू हुई जनधन योजना के जरिए करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया. इससे डिजिटल लेन-देन और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ी.
नई शिक्षा नीति और नए कानून: मोदी सरकार ने 34 साल बाद नई शिक्षा नीति लागू कर शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए. इसके साथ ही अंग्रेजों के दौर के IPC, CrPC और Evidence Act की जगह नए कानून लागू किए गए. भारतीय न्याय संहिता (BNS) समेत नए कानूनों को ‘वि-औपनिवेशीकरण’ की दिशा में बड़ा कदम माना गया.
अब और क्या-क्या काम बाकी
वन नेशन वन इलेक्शन- केंद्र की एनडीए सरकार ने वन नेशन वन इलेक्शन का एजेंडा अपने हाथों में लिया है. पूर्व राष्ट्रपति रामननाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है. इसके लिए संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश कानून(संशोधन) विधेयक पेश हो चुका है, जिसे संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया है.
महिला आरक्षण 2029 से लागू कराना- केंद्र सरकार ने बजट सत्र में परिसीमन बिल के साथ महिला आरक्षण कानून पारित कराने की कोशिश की थी, लेकिन संवैधानिक संशोधन कानून के लायक बहुत वो बहुमत नहीं जुटा सकी. सरकार का प्रयास है कि 2029 के पहले ही लोकसभा में महिला आरक्षण लागू कराया जाए.
समान नागरिक संहिता- बीजेपी के एजेंडे में समान नागरिक संहिता भी है. गुजरात, उत्तराखंड और असम जैसे कई राज्यों में समान नागरिक संहिता पर कानून बन चुका है. बीजेपी शासित दूसरे राज्यों में कानून लागू करने की कवायद हो सकती है.
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