NEET Paper Leak: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के मगनिया गांव निवासी आकांक्षा चतुर्वेदी ने NEET पेपर लीक से आहत होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. परिजनों का कहना है कि आकांक्षा का सपना डॉक्टर बनने का था, इसके लिए वो नागपुर में रहकर तैयारी कर रही थी, परीक्षा देने के बाद वो बेहद खुश थी, उसे भरोसा था कि इस बार उसका चयन हो जाएगा. लेकिन जैसे ही पेपर लीक की खबर सामने आई, उसकी उम्मीद बिखर गई और फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत को लेकर अब सरकार को घेरा जा रहा है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर हमला बोला है. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी. आकांक्षा के पिता किसान हैं.बेटी के डॉक्टर बनने के सपने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर ₹3 लाख का कर्ज़ लिया और नागपुर में खुद कुक की नौकरी कर ली, ताकि बेटी वहां कोचिंग कर सके.

“शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया है”
राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट में आगे लिखा कि एक पिता ने जो कर सकता था,सब किया. फिर NEET पेपर लीक हुआ,परीक्षा रद्द हुई.उस अनिश्चितता में आकांक्षा हमें छोड़ कर चली गई. आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं- पीएम मोदी की एक भ्रष्ट, टूटी हुई व्यवस्था की देन है. और धर्मेंद्र प्रधान? आज भी कुर्सी पर हैं. फिर वही कमेटी.वही ट्रांसफर.वही जांच,न सुधार,न न्याय.पीएम मोदी,कुर्सी स्थायी नहीं होती-आती-जाती रहती है.लेकिन आपने 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया है, उसकी कीमत भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है.
आकांक्षा के सुसाइड नोट में झलका दर्द
बता दें कि NEET पेपर लीक से मानसिक तनाव में आकर आकांक्षा चतुर्वेदी ने 20 मई 2026 को कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी.आकांक्षा ने एक भावुक करने वाला सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें उसने माता-पिता से माफी मांगी. नोट में लिखा कि मम्मी-पापा आपको भरोसा था कि आपकी बेटी पढ़-लिखकर डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब दोबारा नीट का पेपर देने की हिम्मत नहीं है मेरे अंदर. पहले पेपर में अच्छे मार्क्स आने की उम्मीद थी, लेकिन अब दोबारा अच्छा पेपर होगा इसकी कोई गारंटी नहीं है. सॉरी मम्मी-पापा मैंने सब बर्बाद कर दिया. इस नोट ने सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि देशभर के उन लाखों छात्रों की पीड़ा सामने ला दी है, जो वर्षों की मेहनत और सपनों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.



