Middle East Crisis: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अब खाड़ी देशों का दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई से बचें. संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर ने साफ कहा है कि नया युद्ध पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है और तेल-गैस आधारित अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. हालिया तनाव, ड्रोन हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बाद खाड़ी देशों ने कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है. वहीं इजरायल अब भी ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की मांग कर रहा है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है.
खाड़ी देशों ने ट्रंप को दी चेतावनी
संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर ने डोनाल्ड ट्रंप से अलग-अलग बातचीत कर ईरान के खिलाफ दोबारा युद्ध शुरू न करने की अपील की है. खाड़ी देशों का कहना है कि सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी और तेल-गैस आधारित अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान होगा. यूएई ने भी अब कूटनीतिक समाधान का समर्थन करते हुए बातचीत को प्राथमिकता देने की बात कही है.
ड्रोन और मिसाइल हमलों से बढ़ा तनाव
फरवरी के आखिर से अप्रैल की शुरुआत तक ईरान और उसके समर्थित मिलिशिया समूहों ने खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे. इन हमलों से बंदरगाहों और ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा. रिपोर्ट्स के मुताबिक उस दौरान यूएई ने अमेरिका और इजरायल के साथ सीमित सैन्य कार्रवाई में सहयोग किया था, जबकि सऊदी अरब ने अपेक्षाकृत संयमित रणनीति अपनाई.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना बड़ी चिंता
ईरान द्वारा रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए समुद्री आवाजाही नियंत्रित करने की कोशिशों का GCC देशों ने विरोध किया. संघर्ष के दौरान होर्मुज लगभग बंद होने से खाड़ी देशों के तेल और गैस निर्यात पर बड़ा असर पड़ा और वैश्विक ऊर्जा कीमतें बढ़ गईं. हाल ही में यूएई के परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमले के बाद तनाव और बढ़ गया, जिसके लिए ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया समूहों को जिम्मेदार ठहराया गया.
पाकिस्तान की मध्यस्थता से शांति प्रयास
8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी. अब पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए दोनों देशों के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बातचीत में प्रगति होने की बात कही है. दूसरी ओर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अब भी ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की वकालत कर रहे हैं.



