Twisha Sharma Case: अभिनेत्री, मॉडल ट्विशा शर्मा केस में आरोपी पति समर्थ सिंह को शनिवार को भोपाल जिला कोर्ट में पेश किया गया जहां कोर्ट ने समर्थ को 7 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। ट्विशा के परिजनों की ओर से दिए गए आवेदन पर कोर्ट ने समर्थ का पासपोर्ट जब्त करने के भी आदेश दिए हैं। शुक्रवार देर रात करीब 2 बजे पुलिस समर्थ को जबलपुर से भोपाल लेकर पहुंची थी। उसे कटारा हिल्स थाने में रखा गया। थाने के बाहर बैरिकेडिंग कर फोर्स तैनात रही। कोर्ट में पेश करने से पहले पुलिस ने भोपाल के जेपी हॉस्पिटल में उसका मेडिकल टेस्ट भी कराया। ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम रविवार को होगा। इसके लिए ।प्प्डै दिल्ली ने चार वरिष्ठ डॉक्टरों की मेडिकल टीम बनाई है। यह टीम आधुनिक उपकरणों के साथ आज शाम 6 बजे राज्य सरकार के चार्टर्ड विमान से रवाना होगी और रात तक भोपाल पहुंच जाएगी।
समर्थ सिंह का जबलपुर कोर्ट में सरेंडर
समर्थ सिंह ट्विशा की मौत के बाद से फरार चल रहा था. पुलिस उसकी तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही थी. पुलिस ने शुरुआत में समर्थ पर 10 हजार रुपये का इनाम रखा, फिर इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया था. समर्थ सिंह जब जबलपुर कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा तो वहां 6 थानों की पुलिस मौके पर तैनात रही. समर्थ को वकीलों के एक केबिन में रखा गया. इस दौरान समर्थ सिंह के वकील सौरभ सुंदर ने कहा कि वह (समर्थ सिंह) आत्मसमर्पण करने आया है. हम मुख्य न्यायिक न्यायाधीश के समक्ष एक आवेदन दाखिल कर रहे हैं.
“जबलपुर में सरेंडर करने का कोई अधिकार नहीं”
वहीं ट्विशा शर्मा के पीड़ित के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि कोर्ट ने आज आदेश दिया है कि (आरोपी) समर्थ सिंह या तो ट्रायल कोर्ट या जांच अधिकारी के सामने सरेंडर करे. ट्रायल कोर्ट भोपाल में है. इसके अलावा, जांच अधिकारी, SIT है, और आज एक आदेश जारी किया गया है कि CBI भी शामिल है. देखिए कि एक सेवानिवृत्त जज के बेटे को कैसे बचाया जा रहा है. उसे जिला अदालत, जबलपुर में सरेंडर करने का कोई अधिकार नहीं है. हमें पता चला कि वह सरेंडर करने आया है. कोई सरेंडर नहीं हुआ है.
“जमानत हासिल करने के लिए गढ़ी गई कहानियां हैं”
अनुराग श्रीवास्तव ने आगे कहा कि जिला अदालत जबलपुर के कोर्ट रूम के अंदर समर्थ सिंह अंधेरे में आराम से बैठा था, सारी लाइटें बंद थीं उसने मास्क पहना हुआ था. वहां तीन क्लर्क मौजूद थे. मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने उसे वहां किस हैसियत से रखा था. उनके पास मेरे सवाल का कोई जवाब नहीं था. जैसे ही समर्थ सिंह ने मुझे देखा, वह भाग गया. उसके वकीलों ने मुझे धक्का दिया. मुझे नहीं पता कि पुलिस यहां आई थी या नहीं. उन्होंने कहा कि वह (समर्थ सिंह) यहां आत्मसमर्पण नहीं कर सकते. अगर ऐसा होता, तो भोपाल से इतनी दूर आकर यहां छिपने में कोई खतरा नहीं था, लेकिन अब अचानक वापस जाने में खतरा क्यों? ये सब सिर्फ जमानत हासिल करने के लिए गढ़ी गई कहानियां हैं. नहीं, जबलपुर में आत्मसमर्पण नहीं किया जा सकता.



