Lucknow Bulldozer Action: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज रविवार को कैसरबाग स्थित जिला और सिविल कोर्ट में नगर निगम ने एक बड़ी बुलडोजर कार्रवाई को अंजाम दिया. इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. कोर्ट परिसर से लेकर निबंधन कार्यालय तक सड़क और नाले पर बने करीब 240 अवैध वकीलों के चैंबरों और दुकानों को ढहा दिया गया. इस दौरान वकीलों और पुलिसकर्मियों में भिडंत भी हो गई. बुलडोज़र कार्रवाई से नाराज़ एक वकील ने विरोध प्रदर्शन के दौरान फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने हस्तक्षेप किया और किसी भी तरह के नुकसान से पहले ही उन्हें उनके चैंबर से हटा दिया.
16 मई तक अवैध कब्जे हटाने का दिया था अल्टीमेटम
बता दें कि यह पूरी कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच द्वारा अनुराधा सिंह की याचिका पर दिए गए निर्देश के बाद की गई है. बताया जा रहा है कि अवैध निर्माणों की वजह से कोर्ट के आसपास का रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया था. नगर निगम की ओर से 12 मई को इन अवैध ढांचों पर लाल निशान लगाकर 16 मई तक हटाने का अल्टीमेटम दिया था. रविवार को अदालत की छुट्टी की वजह से नगर निगम ने आज का दिन अतिक्रमण हटाने के लिए चुना. रविवार सुबह 9 बजे के करीब नगर निगम की टीम कई जेसीबी मशीनों और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची. नगर निगम की कार्रवाई से वकीलों में भारी नाराजगी देखी गई. वकीलों का आरोप है कि नगर निगम की ओर से उनको उचित समय नहीं दिया गया. उनके चैंबरों को बैठने का दूसरा विकल्प दिए बिना ही तोड़ दिया गया. वकीलों के भारी विरोध को देखते हुए मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.
प्रशासन का मामले पर क्या कहना है?
वहीं, प्रशासन का बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कहना है कि फुटपाथ, नाले-नालियों और सड़क पर वकीलों ने अपने चैंबर और कुछ लोगों ने वहां फोटोकॉपी की दुकानें बना ली थी. जिसकी वजह से आमजन को परेशानी हो रही थी. अवैध कब्जा हटाने के लिए पहले नोटिस भी जारी किया गया था. कुछ लोगों ने नोटिस मिलने के बाद अपने कब्जे हटा लिए थे, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में निर्माण बने हुए थे. इसी को देखते हुए बुलडोजर कार्रवाई करने का फैसला लिया गया.
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