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चीन के साथ अमेरिका की 9 लाख करोड़ की बोइंग विमान डील संभव, Trump ने कहा था चीन की मदद की जरूरत नहीं

Trump reached china

Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बुधवार को 8 साल बाद चीन पहुंचे। अमेरिकी राष्ट्रपति की चीन यात्रा पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं। संभावना है कि ट्रंप की यात्रा के दौरान अमेरिका और चीन के बीच नौ लाख करोड की बोइंग विमान डील हो सकती है। इससे पहले अमेरिका ने ईरान के साथ युद्व के समय कहा था कि उसे चीन की मदद की आवश्यकता नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति का विमान बीजिंग कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड किया, जहां चीनी उपराष्ट्रपति हान जेंग और चीनी डिप्लोमैट शी फेंग ने उन्हें रिसीव किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ट्रम्प के बीच गुरुवार और शुक्रवार को अलग-अलग दौर की बातचीत होगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ताइवान, रेयर अर्थ मिनरल्स, एआई और ईरान युद्ध जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ट्रम्प 15 मई तक बीजिंग में रहेंगे। यह 2017 के बाद उनका पहला चीन दौरा है।

बोइंग विमान डील संभव

चीन 500 बोइंग 737 मैक्स, 100 बोइंग 787 ड्रीमलाइन और कई 777 एक्स वाइडबॉडी विमान खरीद सकता है। अगर करार हुआ तो यह इतिहास का सबसे बड़ा विमान सौदा होगा। ट्रम्प के साथ इलॉन मस्क, एप्पल सीईओ टिम कुक और बोइंग सीईओ समेत 17 बड़े अमेरिकी कारोबारी भी गए हैं। हालांकि चिप कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेनसन हुआंग इस दौरे में शामिल नहीं होंगे।

ईरान जंग खत्म करने के लिए चीन की जरूरत नहीं

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए उन्हें चीन की मदद की जरूरत नहीं है। ट्रम्प ने यह बयान वॉशिंगटन से बीजिंग रवाना होते समय दिया था। पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा था कि मुझे नहीं लगता कि हमें ईरान के मामले में किसी मदद की जरूरत है। अमेरिका यह युद्ध किसी भी तरह जीत जाएगा। जब ट्रम्प से पूछा गया कि क्या अमेरिका में लोगों की आर्थिक परेशानियां उनके फैसलों को प्रभावित कर रही हैं, तो उन्होंने कहा, मैं अमेरिकियों की आर्थिक स्थिति के बारे में नहीं सोचता। मैं सिर्फ एक बात सोचता हूं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।

चीन ने बदला अमेरिकी विदेश मंत्री का नाम

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्काे रुबियो ट्रम्प के साथ चीन जा रहे हैं। खास बात यह है कि चीन ने पहले ही मार्काे रुबियो पर प्रतिबंध लगा रखा था। मार्काे रुबियो पहले अमेरिका में सांसद थे और वे अक्सर चीन की आलोचना करते थे। उन्होंने उइगर मुसलमानों और हांगकांग के मुद्दे पर चीन के खिलाफ आवाज उठाई थी। इससे नाराज होकर चीन ने उन पर प्रतिबंध लगा दिए थे, जिनमें चीन में आने पर रोक भी शामिल थी। लेकिन अब चीन ने एक नया तरीका निकाला है। चीन ने मार्काे रुबियो के नाम को चीनी भाषा में लिखने का तरीका बदल (ट्रांसलिटरेशन) दिया। माना जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि पुराने नाम पर लगे प्रतिबंध नए नाम पर लागू न हों और उनकी चीन यात्रा हो सके। ट्रांसलिटरेशन का मतलब है किसी नाम या शब्द को दूसरी भाषा की लिपि में लिखना। आसान भाषा में कहें तो चीन ने रुबियो लिखने का तरीका बदल दिया ताकि तकनीकी रूप से वह पुराना प्रतिबंधित नाम न माना जाए।

चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ट्रम्प को स्टेट डिनर देंगे

व्हाइट हाउस के मुताबिक चीन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग, डोनाल्ड ट्रम्प के सम्मान में स्टेट डिनर आयोजित करेंगे। चीन में इस तरह के स्टेट डिनर को बड़े कूटनीतिक सम्मान के तौर पर देखा जाता है। ऐसे कार्यक्रम आमतौर पर बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित किए जाते हैं, जहां चीन का शीर्ष नेतृत्व विदेशी मेहमानों का स्वागत करता है। इसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी प्रतिनिधि और खास मेहमान शामिल होते हैं। डिप्लोमैटिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन किसी विदेशी नेता को जितना बड़ा औपचारिक स्वागत देता है, उसे रिश्तों की अहमियत का संकेत माना जाता है। स्टेट डिनर के जरिए चीन यह संदेश देने की कोशिश करता है कि वह अमेरिका के साथ रिश्तों को रणनीतिक स्तर पर महत्व दे रहा है। ट्रम्प के पहले कार्यकाल में 2017 के चीन दौरे के दौरान भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनके सम्मान में विशेष स्वागत कार्यक्रम रखा था।

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ईरानी तेल खरीदने पर चीन का अमेरिका से विवाद

ईरान से तेल खरीद को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। ट्रम्प प्रशासन का आरोप है कि चीन बड़े पैमाने पर ईरानी तेल खरीदकर तेहरान को आर्थिक सहारा दे रहा है, जबकि चीन इसे अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा मामला बता रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद चीन लंबे समय से ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीदता रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ता तेल खरीदने की रणनीति अपनाता है। ईरान पर प्रतिबंध लगने के बाद उसे अपना तेल डिस्काउंट पर बेचना पड़ता है। चीन की कई निजी रिफाइनरियां इसी रियायती तेल को खरीदती हैं। इससे चीन को सस्ती ऊर्जा मिलती है, जबकि ईरान को विदेशी मुद्रा कमाने का बड़ा रास्ता मिलता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के वर्षों में ईरान के कुल तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन जाता रहा है। कई बार यह कारोबार सीधे ईरान के नाम से नहीं, बल्कि दूसरे देशों के जरिए या ब्लेंडेड ऑयल के रूप में किया जाता है, ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों से बचा जा सके।

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