Women Reservation Bill: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने संसद के स्पेशल सेशन में आज(17 अप्रैल) महिला रिज़र्वेशन और डिलिमिटेशन पर बात की. उन्होंने कहा कि महिलाएं हमारे देश की सोच में एक ड्राइविंग फ़ोर्स हैं. हम सभी ने अपनी ज़िंदगी में महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है. पहला सच तो यह है कि यह महिलाओं का बिल नहीं है. इसका महिलाओं के एम्पावरमेंट से कोई लेना-देना नहीं है. यह भारत के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है. महिलाएं हमारी राष्ट्रीय सोच और हमारे राष्ट्रीय दृष्टिकोण में एक केंद्रीय शक्ति, एक प्रेरक शक्ति हैं. हम सभी इस कमरे में मौजूद हर एक व्यक्ति अपने जीवन की महिलाओं से प्रभावित हुए हैं, उनसे सीखा है और बहुत कुछ जाना है हमारी माताएं, बहनें और पत्नियां. जैसा कि किरेन रिजिजू ने कहा बेशक, प्रधानमंत्री और मेरे सामने ‘पत्नी’ वाला मुद्दा नहीं है.
राहुल गांधी ने आगे कहा कि कल मैं बैठा अपनी बहन को कुछ ऐसा करते हुए देख रहा था, जो उसने महज़ पांच मिनट में कर दिखाया एक ऐसी चीज़, जिसे मैं शायद अपने 20 साल के राजनीतिक करियर में भी नहीं कर पाया था और वह थी अमित शाह के चेहरे पर मुस्कान लाना.
“महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं”
कांग्रेस सांसद (Rahul Gandhi) ने कहा कि पहली सच्चाई यह है कि यह कोई महिला बिल नहीं है. इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है. एक महिला बिल है. वह 2023 में इसी सदन में पास हुआ था और बीजेपी में मेरे दोस्तों और शिक्षकों ने कहा था कि इसे 10 साल के समय में लागू किया जाएगा. लेकिन वह महिला बिल है. यह भारत की महिलाओं का इस्तेमाल करके और उनके पीछे छिपकर भारत के चुनावी नक्शे को बदलने की एक कोशिश है. उन्होंने कहा कि आप दक्षिण भारतीय राज्यों से, आप पूर्वोत्तर के राज्यों से, आप भारत के छोटे राज्यों से कह रहे हैं कि बीजेपी को सत्ता में बनाए रखने के लिए, हम आपसे आपका प्रतिनिधित्व छीन लेंगे. यह देश-विरोधी काम से कम कुछ भी नहीं है. आप यही कर रहे हैं और किसी भी हाल में हम आपको ऐसा करने नहीं देंगे. इसलिए मैं अभी आपसे बहुत साफ़-साफ़ कह रहा हूं कि पूरा विपक्ष, राष्ट्र-राज्य पर हमला करने और ओबीसी और दलितों को समाज में उनका सही हक़ दिलाने से वंचित करने की आपकी इस कोशिश को नाकाम कर देगा.
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“यह एक शर्मनाक हरकत है”
उन्होंने (Rahul Gandhi) कहा कि असल में, यह एक शर्मनाक हरकत है. क्योंकि उन्हें महिला आरक्षण देने के बजाय जो करना बहुत आसान है और विपक्ष का हर एक व्यक्ति अभी इसका समर्थन करेगा उस पुराने बिल को अभी वापस पास कर दें, और हम इसे इसी पल से लागू करवाने में आपकी मदद करेंगे. वह है महिला बिल. यह कुछ और ही है. यह क्या है, इसके बारे में सच बताया जाना चाहिए. भारत के इतिहास में, भारत के अतीत और वर्तमान में एक केंद्रीय सत्य निहित है और मैं इस सत्य के प्रति और भी अधिक जागरूक हुआ हूं. वह है ओबीसी समुदाय, दलित समुदाय और अन्य समुदायों अल्पसंख्यकों और महिलाओं के साथ किया जाने वाला क्रूर, निर्मम और बेरहम बर्ताव.
“घरों की कोई जाति नहीं होती”
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि संविधान के ऊपर मनुवाद. अमित शाह कहते हैं कि जाति जनगणना शुरू हो गई है और कल उन्होंने दो बार यह बात दोहराई होशियारी दिखाने की कोशिश करते हुए कि घरों की कोई जाति नहीं होती. असली मुद्दा यह नहीं है कि घरों की जाति होती है या नहीं. असली मुद्दा यह है कि क्या जाति जनगणना का इस्तेमाल संसद में प्रतिनिधित्व के लिए किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा, “राहुल गांधी ओबीसी और धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए विधानसभा और संसद में आरक्षण की बात कर रहे हैं. इसकी अनुमति नहीं है. जब कांग्रेस ने 60 साल से ज़्यादा समय तक इस देश पर राज किया, तो कांग्रेस पार्टी ने ओबीसी को वह संवैधानिक आरक्षण क्यों नहीं दिया?
“प्रतिनिधित्व को छूने की हिम्मत भी नहीं कर पाएंगे”
लोकसभा में विपक्ष के नेता (Rahul Gandhi) ने कहा कि मैं पूरे देश में अपने दोस्तों, भाइयों और बहनों को भरोसा दिलाना चाहता हूं दक्षिणी राज्यों, छोटे राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि आप बिल्कुल भी चिंता न करें. हम उन्हें ‘यूनियन ऑफ़ इंडिया’ (भारत संघ) पर हमला करने की इजाज़त बिल्कुल नहीं देंगे. आप ‘यूनियन ऑफ़ इंडिया’ में बराबर के भागीदार हैं. वे ‘यूनियन ऑफ़ इंडिया’ में आपके प्रतिनिधित्व को छूने की हिम्मत भी नहीं कर पाएंगे.



