IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग(IPL) में जब छक्के-चौके लगते हैं तो स्टेडियम में संगीत और डांस का जीवंत दृश्य सामने आता है. जो आईपीएल का हिस्सा बन चुका है. लेकिन इसके पीछे की कहानी और भर्ती के पीछे की सच्चाई क्या है. ये बहुत कम ही लोग जानते हैं. चीयरलीडर्स का चयन सीधा नहीं होता. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(BCCI) या फ्रेंचाइजी कोई सार्वजनिक नोटिफिकेशन जारी नहीं करतीं. यह जिम्मेदारी इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों को दी जाती है. जो देश-विदेश से प्रोफेशनल डांसर और परफॉर्मर्स का चयन करती हैं.
चीयरलीडर्स बनने की प्रक्रिया भी किसी रियलिटी शो से कम नहीं है. चीयरलीडर्स बनने के लिए ऑनलाइन कास्टिंग, डांस ऑडिशन, फिटनेस टेस्ट और कैमरा प्रेजेंस का मूल्यांकन शामिल होता है. ये सब प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम चयन के बाद ही फ्रेंचाइजी कॉन्ट्रैक्ट करती हैं.
कमाई और कॉन्ट्रैक्ट की हकीकत
इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, चीयरलीडर्स को प्रति मैच लगभग 12,000 से 25,000 रुपये मिलते हैं. इसके अलावा उन्हें होटल और अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं. लेकिन यह पूरी तरह कॉन्ट्रैक्ट आधारित काम है. हर सीजन में नई भर्ती होती है, इसलिए इसमें स्थायित्व नहीं होता और कलाकारों को हर बार खुद को साबित करना पड़ता है.
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कहां से आया यह कॉन्सेप्ट?
चीयरलीडिंग की शुरुआत भारत में नहीं, बल्कि अमेरिका में हुई. 1898 में University of Minnesota में पहली बार दर्शकों को संगठित तरीके से उत्साहित करने की परंपरा शुरू हुई. बाद में National Football League ने 1960-70 के दशक में इसे ग्लैमर और प्रोफेशनल रूप दिया. भारत में यह ट्रेंड 2008 में IPL की शुरुआत के साथ आया, जहां क्रिकेट को ‘स्पोर्ट्स प्लस एंटरटेनमेंट’ के रूप में पेश किया गया.
विदेशी चेहरों की ज्यादा मौजूदगी क्यों?
IPL में विदेशी चीयरलीडर्स की संख्या अक्सर ज्यादा नजर आती है. इसकी वजह है इंटरनेशनल डांस इंडस्ट्री अधिक संगठित है और एजेंसियों के पास ग्लोबल टैलेंट पूल उपलब्ध होता है. हालांकि भारतीय कलाकारों के लिए भी मौके हैं, लेकिन इसके लिए प्रोफेशनल ट्रेनिंग और मजबूत नेटवर्क जरूरी माना जाता है.
ग्लैमर बनाम सच्चाई
मैदान पर चीयरलीडर्स का काम जितना आकर्षक दिखता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है. कड़ी प्रतिस्पर्धा, सीमित अवसर और अस्थायी कॉन्ट्रैक्ट इस पेशे की वास्तविकता हैं. इसके बावजूद, वे IPL के माहौल को जीवंत बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं और ग्लोबल स्पोर्ट्स कल्चर का हिस्सा बन चुकी हैं.



