ईरान इस समय गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। देश में रिकॉर्ड महंगाई, गिरती करेंसी और बेरोजगारी के खिलाफ जनता का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने अब बड़े पैमाने पर हिंसक रूप ले लिया है, जिससे देशभर में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
देशभर में फैली अशांति
प्रदर्शन अब राजधानी तेहरान तक सीमित नहीं रहे। कई प्रांतों और शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। दुकानों को बंद कर विरोध जताया जा रहा है, जबकि कई इलाकों में आगजनी, नारेबाजी और सुरक्षा बलों से झड़प की खबरें सामने आई हैं। अब तक इन घटनाओं में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया है।
दर्जनों शहरों तक पहुंचा आंदोलन
आर्थिक बदहाली के खिलाफ उठी यह आवाज अब दर्जनों शहरों और सैकड़ों इलाकों तक फैल चुकी है। मशहद, जाहेदान, कजवीन, हमदान और तेहरान जैसे प्रमुख शहरों में लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं। कई जगहों पर भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद हालात काबू में आते नहीं दिख रहे।
ट्रंप के बयान से बढ़ा Gen Z का जोश
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की गई, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा। इस बयान के बाद खासकर युवा वर्ग और Gen Z के बीच उत्साह और बढ़ गया है।
ईरानी नेतृत्व पर तीखे हमले
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी आवाजों ने ईरान की सरकार और राष्ट्रपति पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बयानों में ईरानी नेतृत्व पर जनता के खून को नजरअंदाज करने और दमनकारी रवैये अपनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन बयानों ने युवाओं को और अधिक मुखर बना दिया है।
रात में भी जारी रहे प्रदर्शन
तेहरान के कई इलाकों में रात के समय भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। कुछ जगहों पर सरकारी प्रतीकों को हटाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं। सुरक्षा बलों ने हालात काबू में करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया और कई लोगों को गिरफ्तार किया।
सबसे ज्यादा हिंसा इन इलाकों में
कुछ प्रांतों में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं, जहां गोलीबारी, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। ऑनलाइन सामने आए वीडियो में सड़कों पर जलती वस्तुएं और गुस्साई भीड़ देखी जा सकती है, जो सरकार के खिलाफ नारे लगा रही है।
क्यों भड़का जनआक्रोश?
ईरान में बढ़ती महंगाई इस विरोध की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। ईरानी मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। एक डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत ऐतिहासिक गिरावट पर है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महंगाई दर 40 फीसदी से ऊपर पहुंच चुकी है। खाने-पीने की चीजें, दवाइयां और स्वास्थ्य सेवाएं आम जनता की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं।
आगे और बिगड़ सकते हैं हालात
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन और तेज हो सकता है। युवा वर्ग की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया ने इस विरोध को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।
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