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New Delhi: मनरेगा का नाम बदलने पर कांग्रेस का बड़ा हमला, राहुल बोले- मोदी वन मैन शो चला रहे

New Delhi

New Delhi: मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत- रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) किए जाने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “गांधी सरनेम” से दिक्कत है, इसी वजह से महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजना का नाम बदला गया। शनिवार को दिल्ली में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक के बाद खड़गे ने घोषणा की कि कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ 5 जनवरी से देशव्यापी आंदोलन चलाएगी और सड़कों पर उतरकर विरोध करेगी।

राहुल गांधी का हमला

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलने का फैसला न तो कैबिनेट से पूछा गया और न ही राज्यों से कोई सलाह ली गई। उन्होंने कहा  “देश मोदी जी के वन मैन शो से चल रहा है। जो फैसला पीएम हाउस से निकलता है, वही लागू हो जाता है। इसका फायदा सिर्फ 2-3 अरबपतियों को मिल रहा है, जबकि नुकसान ग्रामीण भारत को हो रहा है।” राहुल ने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि राइट-बेस्ड कॉन्सेप्ट था, जिससे करोड़ों लोगों को न्यूनतम आय की गारंटी मिलती थी। इसे खत्म करना गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला है।

खड़गे का आरोप: गरीबों के अधिकार कुचले जा रहे

खड़गे ने कहा कि मनरेगा को सोनिया गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने कानून का दर्जा दिया था।
उन्होंने कहा-

  • मनरेगा ने लाखों गरीब परिवारों को जीवन दिया
  • गांधी जी का नाम हटाना राष्ट्रपिता का अपमान है
  • सरकार अमीरों के साथ खड़ी है, गरीबों के साथ नहीं
  • अंबानी-अडाणी का कर्ज माफ होता है, मजदूरों के लिए पैसा नहीं

बैठक में शशि थरूर की मौजूदगी

CWC बैठक में खड़गे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की साजिश बताया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करें कि गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से न हटें। इस अहम बैठक में कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी शामिल हुए। यह बिहार चुनाव में हार के बाद CWC की पहली बैठक थी, जिसमें कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे।

नए कानून पर कांग्रेस की आपत्ति

UPA काल के MGNREGA की जगह लाए गए नए कानून को संसद के शीतकालीन सत्र में पास कर राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। नए कानून में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है, लेकिन फंडिंग का बोझ अब केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में बांटा गया है। कांग्रेस का आरोप है कि यह बदलाव राज्यों के अधिकार छीनने और गरीबों को कमजोर करने की साजिश है।

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