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ईरान ने यूएन में की अमेरिका की शिकायत, चेतावनी पर कहा हमें सेल्फ डिफेंस का अधिकार

ईरान ने यूएन में की अमेरिका की शिकायत

Tehran: ईरान ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अमेरिका की शिकायत की है। यूएन में ईरान ने कहा है कि हमें सेल्फ डिफेंस का अधिकार है। यह बात ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी के बाद कही जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान ने अपने परमाणु ठिकाने दोबारा बनाए, तो अमेरिका उन्हें फिर तबाह करेगा. ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाया गया, तो अमेरिका जवाब देने के लिए तैयार है. ईरान की राजधानी तेहरान से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब देश के कई शहरों और कस्बों तक फैल चुके हैं. अब तक सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में कम से कम छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. सरकारी मीडिया इन प्रदर्शनों को हल्का दिखा रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो हालात की गंभीरता बयां कर रहे हैं. ये विरोध प्रदर्शन रविवार को तेहरान से शुरू हुए थे. यहां दुकानदारों ने बढ़ती महंगाई और आर्थिक ठहराव के खिलाफ हड़ताल कर दी. ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की मार झेल रही है. महंगाई चरम पर है और ईरानी मुद्रा लगातार कमजोर होती जा रही है. इस प्रदर्शन में लोगों को अमेरिका का साथ मिला है. वहीं ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने लोगों से कहा है कि वह तख्तापलट कर दें.

ईरान के कई शहरों में प्रदर्शन

अब यह गुस्सा छात्रों तक पहुंच गया है. तेहरान के साथ-साथ इस्फहान और यज्द जैसे शहरों में यूनिवर्सिटीज में प्रदर्शन शुरू हो गए. राजधानी के मशहूर बाजार के कुछ व्यापारियों ने भी विरोध में अपनी दुकानें बंद कर दीं. अब तक करीब 20 इलाकों में प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं, जिनमें से ज्यादातर पश्चिमी ईरान के कस्बे हैं. दक्षिणी शहर फासा में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारत के बाहर जमकर हंगामा किया. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में लोग इमारत के गेट को तोड़ने की कोशिश करते और पत्थर फेंकते दिखे. इन वीडियो की लोकेशन की पुष्टि हो चुकी है.

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ईरान में सत्ता विरोधी नारे लगे

मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, प्रदर्शन में अब सिर्फ महंगाई नहीं, बल्कि सरकार और सत्ता व्यवस्था के खिलाफ नारे भी लग रहे हैं. ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ और ‘महिला, जीवन, आजादी’ जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं. यही नारे 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए ऐतिहासिक प्रदर्शनों में भी गूंजे थे. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार गुस्सा सिर्फ सुधार की मांग तक सीमित नहीं है. अटलांटिक काउंसिल से जुड़ी मानवाधिकार वकील गिसू निया के मुताबिक, प्रदर्शनकारी अब सिस्टम से ही सवाल कर रहे हैं. उनका कहना है कि ईरान इस वक्त अंदरूनी संकट के साथ-साथ बाहरी दबावों से भी घिरा हुआ है.

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