Supreme Court Hearing : सुप्रीम कोर्ट की उच्च स्तरीय जांच कमेटी 29 अक्टूबर को जंतर-मंतर हिंसा की सुनवाई करेगी। इस दौरान कोई भी व्यक्ति प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े सबूत पेश कर सकता है। दरअसल कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर 36 दिन प्रदर्शन किया था। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प हुई थी। इस दौरान 150 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
पुलिस पर पैलेट गन चलाने के आरोप
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बदसलूकी के अलावा पैनल पैलेट गन के इस्तेमाल और महिला प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी के आरोप लगाए थे। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों की जांच के लिए 18 अगस्त को हाई पावर्ड इंक्वायरी कमेटी बनाई थी। अब यह कमेटी अगले शुक्रवार 29 अक्टूबर की सुबह 11 बजे से शिक्षा सदन, 17 राउज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया में बने पैनल ऑफिस सुनवाई करेगी।
ऑनलाइन भी जमा कर सकेंगे बयान और सबूत
ज्यादा लोगों की भागीदारी और गवाहों की सुरक्षा के लिए कमेटी ने ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है। प्रभावित लोग, गवाह और दूसरे संबंधित पक्ष इस पोर्टल पर बयान, दस्तावेजी सबूत अपलोड कर सकते हैं। पहले जारी सार्वजनिक नोटिस में कहा गया था कि ऑनलाइन पोर्टल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों को पूरी सुरक्षा देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उनकी पहचान गोपनीय रखने और उनके बयान व सबूतों को पूरी तरह गुप्त रखने को कहा है।
पैनल किन आरोपों की जांच करेगा
पैनल दोनों पक्षों की ओर से जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों की भी जांच करेगा। पहले अधिकारियों ने सुनवाई दो दिन होने की बात कही थी। बाद में उन्होंने साफ किया कि 29 अक्टूबर को सिर्फ एक दिन की सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी में 5 सदस्य
रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पैनल बनाया गया है। पैनल में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड डीजीपी एलआर बिश्नोई शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह कमेटी गठित की थी। इन याचिकाओं में आंदोलन के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ज्यादती के आरोप लगाए गए थे।


