America: स्पेन के बाद अब इटली ने भी अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने यहां से उडाने से रोक लगा दी है। नाटो के सदस्य देश एक एक करके अमेरिका को अपने यहां के मिलिट्री बेस का उपयोग करने से इंकार करते जा रहे हैं। इटली का अमेरिका मिलिट्री बेस सिसिली आइलैंड पर है। मिडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका यहां विमान उतरना चाहता था, लेकिन इटली ने इजाजत नहीं दी। दूसरी ओर रुस का बयान आया है कि अमेरिका और इजराइल शांति नहीं चाहते।
मिडिल ईस्ट जाना था विमानों को
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के कुछ बॉम्बर विमान इटली के इस बेस पर उतरकर आगे मिडिल ईस्ट जाना चाहते थे। लेकिन इटली को इस प्लान की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। अमेरिका ने न तो इटली से इजाजत मांगी और न ही उसके सैन्य अधिकारियों से बात की। इससे कुछ दिन पहले स्पेन भी ऐसा ही कदम उठा चुका है। स्पेन ने ईरान जंग में शामिल अमेरिकी विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था।
ईरान में हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक
अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर में एक बड़े हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की है। वॉल स्ट्रीट जर्नल रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला सोमवार रात को किया गया। इसके लिए 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल हुआ। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि इस डिपो में बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य सामग्री रखी गई थी, जिसे निशाना बनाया गया। बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल मजबूत और भूमिगत ठिकानों को तबाह करने के लिए किया जाता है। हमले के बाद डिपो में रखे हथियारों में विस्फोट होने से कई धमाके हुए और इलाके में आग के बड़े गुबार उठे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी सोशल मीडिया पर धमाकों का एक वीडियो शेयर किया है।
रूस का आरोप- अमेरिका-इजराइल शांति नहीं चाहते
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि अमेरिका और इजराइल, ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच सामान्य रिश्ते (नॉर्मलाइजेशन) नहीं चाहते हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, लावरोव ने कहा कि क्षेत्र में चल रहे “रेजीम चेंज” के पीछे असली मकसद तेल और गैस संसाधनों पर ज्यादा कंट्रोल हासिल करना है। लावरोव ने चेतावनी दी कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो यह संकट पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है और एक बड़े संघर्ष में बदल सकता है।
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ट्रम्प बोले- तेल नहीं मिल रहा तो हमसे खरीदो
डोनाल्ड ट्रम्प ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन जैसे देश जो होर्मुज स्ट्रेट से फ्यूल नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल है। उन्होंने कहा कि ये देश हिम्मत दिखाएं, होर्मुज तक जाएं और उसे अपने कंट्रोल में लें। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अब देशों को खुद अपनी लड़ाई लड़ना सीखना होगा और अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे वे पहले अमेरिका की मदद के लिए नहीं आए थे। उन्होंने अपने बयान में कहा कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और अब देशों को अपना तेल खुद हासिल करना चाहिए।
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