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उम्र से जुड़ी पाबंदियों को लागू करने, Meta कर रहा है AI का इस्तेमाल

Meta check age

Meta:  अपने सभी प्लेटफ़ॉर्म पर उम्र से जुड़ी पाबंदियों को लागू करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रहा है। एक ऑनलाइन पोस्ट में, कंपनी ने बताया कि वह यूज़र प्रोफ़ाइल को स्कैन करने के लिए AI का इस्तेमाल करेगी, ताकि उम्र से जुड़ी पाबंदियों के उल्लंघन के संकेतों का पता लगाया जा सके। कंपनी ने लिखा, “हम इन संकेतों को अलग-अलग फ़ॉर्मेट में देखते हैं, जैसे पोस्ट, कमेंट, बायो और कैप्शन। हम इस टेक्नोलॉजी को अपने ऐप्स के दूसरे हिस्सों, जैसे Instagram Reels, Instagram Live और Facebook Groups में भी लगातार बढ़ा रहे हैं।” कंपनी ने आगे कहा, “अगर हमें लगता है कि कोई अकाउंट किसी नाबालिग का हो सकता है, तो उसे डीएक्टिवेट कर दिया जाएगा।

अपनी उम्र का सबूत देना होगा

अकाउंट होल्डर को अपना अकाउंट डिलीट होने से बचाने के लिए हमारी उम्र वेरिफ़िकेशन प्रक्रिया के ज़रिए अपनी उम्र का सबूत देना होगा।” Meta ऐसे विज़ुअल एनालिसिस टूल भी इस्तेमाल कर रहा है, जिनकी मदद से उसका AI फ़ोटो और वीडियो को स्कैन करके उम्र से जुड़े ऐसे संकेतों का पता लगा सकेगा, जिन्हें टेक्स्ट के ज़रिए पहचानना मुश्किल होता है। कंपनी ने साफ़ किया, “हम यह साफ़ कर देना चाहते हैं कि यह ‘फ़ेशियल रिकग्निशन’ (चेहरा पहचानने वाली टेक्नोलॉजी) नहीं है। हमारा AI किसी व्यक्ति की अनुमानित उम्र का पता लगाने के लिए सामान्य थीम और विज़ुअल संकेतों (जैसे, लंबाई या हड्डियों की बनावट) पर ध्यान देता है; यह इमेज में दिख रहे किसी खास व्यक्ति की पहचान नहीं करता।” कंपनी ने बताया, “इन विज़ुअल जानकारियों को टेक्स्ट और इंटरैक्शन के हमारे एनालिसिस के साथ मिलाकर, हम उन नाबालिगों के अकाउंट की पहचान करने और उन्हें हटाने की संख्या में काफ़ी बढ़ोतरी कर सकते हैं।”

‘बेहद अविश्वसनीय’

Meta के उम्र वेरिफ़िकेशन के तरीके की आलोचना भी होती है। सैन फ़्रांसिस्को में स्थित एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी डिजिटल अधिकार समूह, Electronic Frontier Foundation में राज्य मामलों की एसोसिएट डायरेक्टर, Rindala Alajaji ने कहा, “बाज़ार में उम्र की जाँच करने के कई अलग-अलग तरीके मौजूद हैं, लेकिन अभी तक ऐसी कोई टेक्नोलॉजी उपलब्ध नहीं है जो पूरी तरह से निजता की सुरक्षा करती हो, पूरी तरह से सटीक हो और जो पूरी आबादी को कवर करने की गारंटी देती हो।” उन्होंने TechNewsWorld को बताया, “‘उम्र का अनुमान लगाने’ (Age estimation) की समस्या यह है कि यह असल में सिर्फ़ एक ‘अंदाज़ा’ होता है। और यह स्वभाविक रूप से ही सटीक नहीं होता।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “उम्र का अनुमान लगाने का तरीका बेहद अविश्वसनीय होता है, खासकर किशोरों के मामले में—जो कि ठीक वही समूह है, जिसकी सुरक्षा करने का दावा उम्र वेरिफ़िकेशन से जुड़े कानून करते हैं।

फ़ेशियल सिस्टम नाकाम साबित

कोई एल्गोरिदम किसी वेबसाइट को यह बता सकता है कि आपकी उम्र 15 से 19 साल के बीच है। जब उम्र की सीमा 18 साल तय हो और किसी युवा के संवैधानिक अधिकार दांव पर लगे हों, तो ऐसी जानकारी किसी काम की नहीं होती।” Alajaji ने यह भी बताया कि उम्र का अनुमान लगाने वाले फ़ेशियल सिस्टम कुछ खास समूहों के मामले में लगातार नाकाम साबित होते हैं। “अलग-अलग रंग के लोगों की पहचान अक्सर गलत हो जाती है, ट्रांस और नॉन-बाइनरी लोगों को अक्सर गलत कैटेगरी में डाल दिया जाता है, और जिन दिव्यांग लोगों की शारीरिक बनावट अलग होती है, वे एल्गोरिदम के ट्रेनिंग पैरामीटर्स से बाहर हो जाते हैं—यानी, जो भी व्यक्ति एल्गोरिदम के ‘आम’ दायरे में फिट नहीं बैठता, उसे फ़्लैग कर दिया जाता है,” उन्होंने समझाया। हालाँकि, वॉशिंगटन, D.C. में स्थित एक रिसर्च और पब्लिक पॉलिसी संस्था—Information Technology & Innovation Foundation—के पॉलिसी एनालिस्ट, एलेक्स एम्ब्रोस का कहना है कि भले ही विज़ुअल एनालिसिस टेक्नोलॉजी अभी पूरी तरह से परफेक्ट न हो, लेकिन यह सटीक है और इसमें लगातार सुधार हो रहा है। “अगर ऑनलाइन सर्विस देने वाली कंपनियाँ AI का इस्तेमाल करके, यूज़र्स की निजी जानकारी इकट्ठा किए बिना और उसे स्टोर किए बिना ही उनकी उम्र का सही-सही अंदाज़ा लगा सकें, तो वे उम्र की पुष्टि (age verification) से जुड़ी कई समस्याओं से बच सकती हैं,” उन्होंने TechNewsWorld को बताया।

निजता से जुड़ी चिंताएँ

Meta के इस कदम से निजता से जुड़ी चिंताएँ भी खड़ी हो गई हैं। टोरंटो स्थित एक वर्कफ़ोर्स इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म—Smart Workforce AI—के CEO, मोहम्मद यूसुफ़ ने कहा, “मैं उनके इस तरीके को समझ सकता हूँ, लेकिन इससे निजता पर असर ज़रूर पड़ता है।” उन्होंने TechNewsWorld को बताया, “जब AI किसी व्यक्ति की उम्र का पता लगाने के लिए उसकी पोस्ट, कैप्शन, कमेंट्स, जन्मदिन से जुड़े संकेतों और तस्वीरों का एनालिसिस करता है, तो यह उम्र की पुष्टि के काम को—जो पहले सिर्फ़ एक साधारण जानकारी देने तक सीमित था—अब कहीं ज़्यादा व्यापक व्यवहारिक और संदर्भ-आधारित एनालिसिस के दायरे में ले आता है।” उन्होंने कहा, “सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और संतुलित बनाए रखा जाए।” “डेटा का एनालिसिस किस तरह किया जाता है? इसे कितने समय तक सुरक्षित रखा जाता है? लिए गए फ़ैसलों के पीछे क्या तर्क होते हैं? और अगर कोई नतीजा गलत निकलता है, तो यूज़र्स उसके ख़िलाफ़ अपील कैसे कर सकते हैं?”

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