AI : टेक कंपनियों ने AI को अपनाने के बाद अमेरिका की ज्यादातर कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही हैं। कंपनियां कर्मचारियों की छटनी को कोरोना समय में गैर जरुरी भर्ती होने का भी कारण बता रही है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि यह कोई कुछ समय का बदलाव नहीं, बल्कि एक स्थायी बदलाव है। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में 92,000 टेक कर्मचारियों को निकाला गया, यानि 2020 से अब तक छह सालों में 9,00,000 लोग अपनी नौकरी खो चुके हैं। इनमें से 20,000 लोग तो सिर्फ टेक की दिग्गज कंपनियों मेटा और माइक्रोसॉफ्ट से निकाले गए हैं। अमेज़ॅन, गूगल, ओरेकल, सेल्सफोर्स, नाइकी और स्नैप जैसी कंपनियां भी छंटनी करने में पीछे नहीं हैं। इसकी वजह AI को अपनाना और कोरोना के समय हुई गैर-जरूरी भर्तियां बताई जा रही हैं।
अभी और नौकरियां जाएंगी
मेटा आने वाले दिनों में 8,000 और लोगों को निकालने की योजना बना रहा है और उसने 6,000 पदों पर नई भर्तियां न करने का फैसला किया है। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट अपने 7ः अमेरिकी कर्मचारियों को स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। नाइकी ने तो 1,400 पद ही खत्म कर दिए हैं।
एआई पर भारी-भरकम निवेश
एक तरफ कंपनियां लागत घटाने के लिए कर्मचारियों को निकाल रही हैं, तो दूसरी तरफ AI पर जमकर पैसा लगा रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक, अल्फाबेट, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेज़ॅन 2026 में कुल मिलाकर 66 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। ओरेकल में छंटनी की वजह से 75,000 से 94,000 करोड़ रुपये की बचत होगी। जो कंपनियां पहले 250 कर्मचारियों के साथ 472 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमाती थीं, वे अब सिर्फ 50 कर्मचारियों के साथ उतना ही कमा रही हैं। ग्लासडोर एम्प्लॉई कॉन्फिडेंस इंडेक्स के अनुसार, टेक सेक्टर में कर्मचारियों का अपनी कंपनी के भविष्य को लेकर भरोसा 6.8ः गिरकर मार्च में 47.2ः पर आ गया है। कहा जा रहा है कि इसी डर से कई लोग खुद ही नौकरी छोड़ रहे हैं।
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