Election : प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर से संशय के बादल छा गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग को लिखे एक पत्र में दोनों संस्थाओं (पंचायत और नगरीय निकाय) के चुनाव करवाने के लिए कम से कम 90 दिन का समय लगने की बात कही है। जानकारों के अनुसार राज्य सरकार अपने स्तर या ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर एससी, एसटी, ओबीसी और महिला के आरक्षण का निर्धारण करके निर्वाचन आयोग को देती है तब आयोग चुनाव का समय निर्धारित करता है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिस तरह से पंचायत राज विभाग को पत्र लिखा है उस हिसाब से इस महीने के आखिर में चुनाव की संभावना खत्म हो गई है।
14 अगस्त तक ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट संभव
बता दें कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई को आदेश देते हुए आयोग को 31 जुलाई तक दोनों संस्थाओं के चुनाव करवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन राज्य में अब तक इन चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण का निर्धारण नहीं हो सका है। पिछले दिनों पंचायती राज विभाग ने एक पत्र निर्वाचन आयोग को लिखा, जिसमें बताया कि ओबीसी आयोग ने अपनी आरक्षण संबंधि रिपोर्ट 14 अगस्त 2026 तक तैयार करके सौंपने के लिए कहा है। अगर रिपोर्ट 14 अगस्त तक आ जाती है तो पंचायती राज विभाग 31 अगस्त तक सभी वर्गाे के पदों का आरक्षण निर्धारित कर देगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद आयोग कितने समय में चुनाव करवा सकता है।
चार और दो चरणों में करवाने पड़ेंगे चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत राज विभाग के पत्र के जवाब में बताया कि अगर आरक्षण का निर्धारण हो जाता है तो विभाग जिस दिन भी चुनाव संबंधि प्रेस विज्ञप्ति जारी करेगा उसके 90 दिवस के अंदर चुनाव संपादित हो जाएंगे। इसमें 50 दिन का समय पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में लगेगा और 40 दिन का समय नगरीय निकाय चुनाव में। आयोग ने बताया कि बढ़ी हुई पंचायतें और संसाधनों को देखते हुए पंचायत चुनाव 4 चरण में करवाए जाने संभावित है, जबकि नगरीय निकाय चुनाव 2 चरणों में पूरे होंगे।
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