Flag Hoisting: प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजस्थान की राजधानी जयपुर की सबसे अनूठी और ऐतिहासिक परंपरा शहर के हृदय स्थल बड़ी चौपड़ पर देखने को मिलती है। जहां हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों जनता के बीच अलग-अलग दिशाओं में ध्वजारोहण करते हैं।
बड़ी चौपड़ पर सत्ता-विपक्ष ने किया झंडा रोहण
जयपुर की बड़ी चौपड़ पर शनिवार को सत्ता और विपक्ष ने झंडा रोहण किया। यहां सत्ता पक्ष की ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने झंडा फहराया, वहीं विपक्ष की ओर से प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने झंडा फहराया।
अनूठी परंपरा
देश के अधिकांश राज्यों में राष्ट्रीय पर्वों के सरकारी आयोजन विधानसभा या सचिवालय परिसरों तक सीमित रहते हैं, लेकिन जयपुर में मुख्यमंत्री से लेकर नेता प्रतिपक्ष तक खुले चौक में आम नागरिकों के बीच तिरंगे को सलामी देते हैं। यही परंपरा बड़ी चौपड़ को देश के लोकतांत्रिक मूल्यों का अनूठा प्रतीक बनाती है।
लोकतंत्र की जीवंत मिसाल
करीब आठ दशक पुरानी यह परंपरा केवल ध्वजारोहण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्कृति की मिसाल है। एक ही चौक पर सत्ता और विपक्ष का अलग-अलग ध्वजारोहण करना यह संदेश देता है कि राष्ट्रीय ध्वज राजनीति से ऊपर है और लोकतंत्र की असली ताकत जनता के बीच ही निहित है। जयपुर की बड़ी चौपड़ आज भी इसी गौरवशाली विरासत को संजोए हुए है।
1947 से चली आ रही है ऐतिहासिक परंपरा
जानकारी के अनुसार देश की आजादी के बाद 15 अगस्त 1947 की शाम बड़ी चौपड़ पर तत्कालीन राज्य प्रमुख टीकाराम पालीवाल ने पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। उस ऐतिहासिक अवसर पर तत्कालीन राजपरिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। इसके बाद कांग्रेस नेता गोकुलभाई भट्ट ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और तब से यह सिलसिला लगातार जारी है।
ऐसे निभाई जाती है परंपरा
बड़ी चौपड़ पर राष्ट्रीय पर्वों के दौरान सबसे पहले सत्तारूढ़ दल पूर्वमुखी होकर ध्वजारोहण करता है। इसके तुरंत बाद विपक्ष दक्षिणमुखी होकर तिरंगा फहराता है। मान्यता है कि पूर्व दिशा उगते सूर्य की प्रतीक है, इसलिए सत्ता पक्ष पूर्वमुखी होकर ध्वजारोहण करता है, जबकि विपक्ष दक्षिण दिशा की ओर ध्वज फहराने की परंपरा निभाता है।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ा है इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार, बड़ी चौपड़ पर ध्वजारोहण की शुरुआत 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान हुई थी। उस समय आजाद मंडल (आजाद मोर्चा) और जयपुर के युवाओं ने यहां राष्ट्रीय ध्वज फहराकर स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी। उस दौर में महाराजा कॉलेज के छात्रों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही।
1968 की राजनीति से जुड़ा रोचक किस्सा
इस परंपरा से एक दिलचस्प राजनीतिक प्रसंग भी जुड़ा है। वर्ष 1968 में प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता और राष्ट्रपति शासन की स्थिति के दौरान ज्योतिषाचार्यों की सलाह पर सत्तारूढ़ दल ने पूर्वमुखी होकर ध्वजारोहण किया। इसके जवाब में विपक्ष ने दक्षिणमुखी होकर तिरंगा फहराया। बाद के वर्षों में प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया और 1971 में मोहनलाल सुखाड़िया के स्थान पर बरकतुल्लाह खान मुख्यमंत्री बने। इस घटना को बड़ी चौपड़ की परंपरा से जोड़कर भी देखा जाता है।
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