Rajasthan Panchayat-Nikay Election:राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव में हो रही देरी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग, राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह और आयोग सचिव को अवमानना नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब तलब किया है. बता दें कि यह कार्रवाई पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई. राजस्थान हाईकोर्ट की कार्यवाही पर राजस्थान विधानसभा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Julie) की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदार तो सरकार है और दूसरे जिम्मेदार अधिकारी भी हैं जो सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं. अधिकारियों को तो नियमानुसार काम करना चाहिए. कभी चुनाव में देरी नहीं हुई. आज जबरदस्ती तानाशाही करके चुनाव में देरी की जा रही है, वोटर लिस्ट प्रकाशन की जो बात सामने आ रही है तो SIR के तहत पूरी मतदाता सूची का शुद्धिकरण हो चुका है.
“आप वोटर लिस्ट में फर्जीवाड़ा करना चाहते हैं”
टीकाराम जूली (Tikaram Julie) ने आगे कहा कि फरवरी में ही नई लिस्ट बनी है, उससे आप क्यों चुनाव नहीं करवाना चाहते हैं? क्योंकि आप वोटर लिस्ट में फर्जीवाड़ा करना चाहते हैं और दूसरी बात ये है कि आज सरकार की स्थिति सही नहीं है, वे जनता के बीच जा नहीं सकते. हाई कोर्ट फटकार लगा रहा है, सुप्रीम कोर्ट फटकार लगा रहा है. संविधान के विरूद्ध ये लोग काम कर रहे हैं ये एक प्रकार से सरकार की तानाशाही है. इसमें डबल इंजन की सहमति है. दोनों को एक ही मंशा है कि संविधान को किसी तरह कमजोर किया जाए. मुझे तो कई बार ऐसा लगता है कि इन चुनावों में देरी करके वे जानना चाहते हैं कि जनता की क्या प्रतिक्रिया होगी ताकि आगामी चुनावों को भी टाल सकें.
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कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 के चुनाव कराने के दिए थे निर्देश
बता दें कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 31दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने तथा 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे. जिसके बाद इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. जहां शीर्ष अदालत ने भी समयबद्ध चुनाव कराने पर जोर दिया था. अब हाईकोर्ट की ताजा सख्ती के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर बेहद अहम माना जा रहा है. राज्य में कई पंचायतों और निकायों में चुनाव की राह पहले ही ओबीसी और परिसीमन प्रक्रिया के कारण उलझी हुई है. ऐसे में अदालत की अगली सुनवाई और चुनाव आयोग के जवाब पर सबकी नजरें टिक गई हैं.



