Ashok Gehlot: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने एक्स पर पोस्ट कर राज्य की भजनलाल सरकार को घेरा है. उन्होंने लिखा कि राजस्थान में कानून-व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर है और सरकार कुंभकर्णी नींद सो रही है. भाजपा के शासन में NCRB के 2024 के आंकड़े गवाह हैं कि देश में दुष्कर्म के मामलों में राजस्थान नंबर एक है, और आज ज़मीनी हालात और भी खौफनाक हो चुके हैं. चाहे जयपुर हो, दौसा, अलवर या बांसवाड़ा, प्रदेश का कोई कोना सुरक्षित नहीं बचा. मासूम बच्चियों को घरों और बाड़ों से अगवा किया जा रहा है. हद तो तब हो जाती है जब न्याय मांगने गई पीड़ित बेटियों को पुलिस ‘समझौते’ का दबाव बनाती है और वो आत्महत्या को मजबूर हो जाती हैं. क्या भाजपा सरकार में अपराधियों का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है? रक्षक ही भक्षक क्यों बन रहे हैं? मुख्यमंत्री, विज्ञापनों और राजनीतिक जोड़-तोड़ से बाहर निकलिए. राजस्थान की जनता को जवाब दीजिए हमारी बेटियां असुरक्षित हैं, इसके लिए ‘किसकी जिम्मेदारी’ है?

“कोई योजनाएं लागू होती नजर नहीं आ रही”
वहीं अशोक गहलोत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि हर सरकार दूसरी सरकार के बारे में अपने फीडबैक के आधार पर बात करती है. अब जनता को फैसला करना है कि जो वो कहते थे वो सही था या जो हम कह रहे हैं वो सही है. अंतिम फैसला जनता को ही करना है. हमारा फीडबैक यह है कि भरतपुर जो उनका( भजनलाल शर्मा) खुद का जिला है, वहां एक ज्वैलर को गोली मार दी गई. आखिर क्या हुआ? शायद 20 दिन बाद जाकर गिरफ्तारी हुई. स्थिति नाजुक बनी हुई है.
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कितनी जगह चौपाल लगाई, कितने दौरे किए और कितनी जगह पर जनसुनवाई की. कितनी जगह लोगों की समस्याएं सुनकर मौके पर समाधान करवाया है? प्रदेशवासियों को इसके बारे में जानकारी देनी चाहिए. उनके दिल्ली दौरे से प्रदेश को क्या लाभ मिला, जनता को बनाता चाहिए. अगर कोई उपलब्धि हासिल की है तो उसका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए. फिलहाल कहीं कोई योजनाएं लागू होती नजर नहीं आ रही है.
“आप प्रदेशवासियों को गुमराह कर रहे हो”
उन्होंने कहा कि पहले वे(सीएम भजनलाल) 32 लाख करोड़ रुपये के निवेश की बात करते थे, लेकिन उसमें से लगभग 28 लाख करोड़ रुपये केवल सोलर प्लांट्स से जुड़े प्रस्ताव थे. ‘राइजिंग राजस्थान’ नाम के उस कार्यक्रम में विदेशी दौरे किए गए, बड़े-बड़े आंकड़े बताए गए, लेकिन आज स्थिति यह है कि अधिकांश परियोजनाएं ठप पड़ी हैं. कंपनियों का कहना है कि जब तक भारत सरकार लाइनें नहीं बिछाएगी, तब तक वे बिजली भेजेंगे कहां? ऐसे में प्लांट लगाकर भी उन्हें नुकसान होगा. इसलिए काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है. मैं नहीं कहता 32 लाख करोड़ के सब आते ही आते हैं, कभी आते भी नहीं हैं. गुजरात में मोदी करते थे, हमने भी किया प्रोग्राम, अगर 25 परसेंट भी आ जाएं तो भी कोई बात नहीं है. आप (सीएम भजनलाल) गुमराह कर रहे हो प्रदेशवासियों को ये अच्छी बात नहीं है.



