दिल्ली से देहरादून की दूरी जल्द ही पहले से कहीं कम हो जाएगी। 210 किलोमीटर लंबे दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण तेज़ी से अंतिम चरण में पहुंच रहा है, और परियोजना को जनवरी 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह जानकारी सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से दी गई है, जिसने बताया कि अधिकांश काम तय समय से पहले की स्पीड में चल रहा है।
13,000 करोड़ रुपये की मेगा परियोजना
इस एक्सप्रेसवे पर लगभग 13,000 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। छह लेन वाले इस आधुनिक एक्सप्रेसवे को देश की सबसे उन्नत सड़क परियोजनाओं में माना जा रहा है। यह न सिर्फ यात्रा का समय घटाएगा, बल्कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच एक नया इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एक्सप्रेसवे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है, जिसमें पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री, सोलर लाइटिंग, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और नॉइज़ बैरियर्स जैसी कई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
कुछ हिस्सों का काम थोड़ा प्रभावित
सूत्रों के मुताबिक, अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) जंक्शन तक 70 मीटर के सर्विस रोड क्षेत्र में निर्माण कार्य थोड़ा धीमा रहा है, लेकिन बाकी सेगमेंट का काम तेज़ी से पूरा किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि एक्सप्रेसवे को निर्धारित समय से पहले जनता के लिए खोल दिया जाए।
इन प्रमुख स्थानों पर होगी एंट्री–एग्ज़िट सुविधाएं
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की शुरुआत अक्षरधाम से होगी और रास्ते में वाहनों के चढ़ने-उतरने के कई महत्वपूर्ण पॉइंट बनाए जा रहे हैं। इनमें शामिल हैं:
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गीता कॉलोनी
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शास्त्री पार्क
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मंडोली विहार (लोनी)
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खेकरा EPE जंक्शन
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बागपत का मंडोला
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लोहड्डा–बड़ौत ईस्ट बाईपास
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करौंदा महाजन
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बाबरी
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गोगवान जलालपुर (थानाभवन)
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शामली साउथ
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सहारनपुर साउथ बाईपास
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सहारनपुर ईस्ट
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गणेशपुर
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आशारोड़ी (देहरादून)
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डाट काली टनल
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हर्रावाला (देहरादून)
इन एंट्री व एग्ज़िट पॉइंट्स के बाद एक्सप्रेसवे पूरी तरह से सफर को अधिक सुगम और तेज़ बनाने में मदद करेगा।
जल्द मिलेगा हाई-स्पीड सफर का तोहफ़ा
निर्माण पूरा होने के बाद दिल्ली से देहरादून की यात्रा लगभग 2.5 से 3 घंटे में पूरी हो सकेगी। अभी यह समय 5 से 6 घंटे तक लगता है। यानी यात्रियों को जल्द ही हाई-स्पीड, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा का अनुभव मिलने वाला है।



