उत्तराखंड सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने और गांवों के समग्र विकास के लिए एक नई और महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत राज्य के हर जिले में दो-दो गांवों को टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य के साथ‑साथ एडवेंचर और ग्रामीण जीवन का अनुभव ले सकेंगे।
सरकार का फोकस इन टूरिज्म विलेज में होम‑स्टे, एडवेंचर टूरिज्म, वेलनेस, एग्री और हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने पर रहेगा। इससे न केवल पर्यटन को नई दिशा मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
टास्क फोर्स करेगी गांवों का चयन
पर्यटन विभाग के निर्देश पर प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स गठित की जाएगी। इसमें ग्रामीण विकास, कृषि, आयुष, उद्यान और पंचायती राज जैसे विभागों को शामिल किया जाएगा। यह टीम गांवों का चयन कर उनके विकास से जुड़े प्रस्ताव तैयार करेगी।
गांवों को मिलेगी नई पहचान
चयनित गांवों में स्थानीय संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए विकास किया जाएगा। होम‑स्टे के निर्माण के साथ‑साथ ट्रेकिंग, कैंपिंग, योग, आयुष, जैविक खेती और साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
इन क्षेत्रों पर रहेगा खास फोकस
सरकार की योजना के अनुसार अलग‑अलग जिलों में गांवों को उनकी विशेषता के आधार पर विकसित किया जाएगा—
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कुछ गांवों को वेलनेस और आयुष टूरिज्म के लिए
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कुछ को एडवेंचर और ट्रैकिंग हब के रूप में
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जबकि कुछ गांवों को एग्री और कम्युनिटी बेस्ड टूरिज्म के लिए तैयार किया जाएगा।
पहले भी हो चुकी है शुरुआत
इससे पहले वर्ष 2024 में राज्य सरकार ने ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 18 गांवों का चयन किया था। अब इस योजना का विस्तार पूरे प्रदेश में किया जा रहा है, जिससे उत्तराखंड के दूरदराज के गांव भी पर्यटन मानचित्र पर उभर सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इस पहल से जहां एक ओर पर्यटकों को नया अनुभव मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पलायन पर भी रोक लगेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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