Rajasthan State Politics: राजनीति में आम जनता से जुडाव बनाए रखने और अपने समर्थकों की संख्या बढाते रहने के लिए नेता कई तरह के तरीके अपनाते हैं। आम जनता के मुद्दों पर धरना प्रदर्शन करना भी उनमें से एक कारगर तरीका है। विधायक रविन्द्र भाटी इन दिनों अपनी राजनीतिक गतिविधियों से सुर्खियां बटोर रहे हैं, भाटी गुरुवार रात जोधपुर के बालेसर में ओरण बचाओ पदयात्रा में शामिल हुए। शिव (बाड़मेर) से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी 70 साल के बुजुर्ग पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह का को कंधों पर बैठाकर एक किलोमीटर पैदल चले।
विधायक भाटी ने बालेसर में पदयात्रियों के साथ ही रात भी बिताई। वे जमीन पर ही सोए।
इस मौके पर विधायक भाटी ने स्थानीय मीडिया को कहा कि एक रात घर से बाहर रहने पर फोन आ जाता है, लेकिन 32 दिन सब कुछ छोड़कर बैठना हंसी का खेल (आसान) नहीं। मैं किसी पार्टी में नहीं हूं। न बीजेपी ने कुछ दिया न कांग्रेस ने।
विधायक भाटी ने संरक्षित वन भूमि बचाने के आंदोलन में बाडमेर जिला प्रशासन के विकास के प्रोजेक्ट का विरोध किया है, उन्होने कहा कि. “सच के लिए आंख से आंख मिलाकर बात करनी पड़ेगी। मैं किसी का विरोधी नहीं, जो सही है वही कहता हूं। यह संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए है।”
ओरण बचाओं पदयात्रा
जैसलमेर के तनोट माता मंदिर से 21 जनवरी को शुरू हुई ओरण बचाओ पदयात्रा गुरुवार रात को जोधपुर के बालेसर पहुंची। जहां चामुंडा माता मंदिर में रात्रि विश्राम किया गया। यह पदयात्रा सुमेर सिंह और भोपाल सिंह के नेतृत्व में जयपुर की ओर बढ़ रही है। पूरी यात्रा में लगभग 725 किलोमीटर दूरी तय की जाएगी। यात्रा में 10 साल के बच्चों से लेकर 75 साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं। पदयात्रा का उद्देश्य ओरण भूमि को ‘विकास’ के नाम पर खत्म होने से बचाना है। स्थानीय लोग इसे पूर्वजों की विरासत और पर्यावरण संरक्षण का आधार मानते हैं।
यह भी पढ़ें : फरीदाबाद नीमका जेल में आतंकी की हत्या के बाद दो अधिकारी निलंबित, सुरक्षा चूक हुई उजागर
32 दिन कलेक्ट्रेट के आगे धरना दिया
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने 32 दिन तक जैसलमेर कलेक्ट्रेट के आगे धरना दिया था। यह धरना ओरण, गोचर और आगौर बचाने के लिए था। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ जमीन नहीं बल्कि संस्कृति, पर्यावरण और भविष्य बचाने का प्रयास है।
यह भी देखें : जयपुर कलेक्ट्रेट सर्किल पर ‘अतिक्रमण’ का अलॉटमेंट! | फुटपाथ पर ठेले, रोड पर जाम
क्यों हो रहा आंदोलन?
ओरण ग्रामीण क्षेत्रों में वनभूमि होती है, जहां पशुओं के लिए चारा, जल स्रोत और जैव विविधता सुरक्षित रहती है। स्थानीय समुदाय इसे धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर मानते हैं।
पदयात्रियों का आरोप है कि विकास परियोजनाओं के कारण यह जमीन लगातार खत्म हो रही है, इसलिए इसे बचाने के लिए जनआंदोलन चलाया जा रहा है।



