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विष्णु के अवतार भगवान विट्ठल मंदिर के पत्थरों से सुनाई देता है संगीत, कोई नहीं सुलझा पाया इसका रहस्य

Vitthal Mandir

Vitthal Mandir : यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर्नाटक के हम्पी में विट्ठल मंदिर या विजया विट्ठल मंदिर की प्राचीन वास्तुकला केवल ईंट और पत्थरों का मेल नहीं है, बल्कि यह विज्ञान, कला और आध्यात्मिकता का एक अनोखा संगम है। तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर अपनी अद्भुत शिल्पकारी के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इस मंदिर में म्युजिकल खंभे हैं, जिनसे संगीत की ध्वनि आती है।

सारेगामा खंभों का रहस्य

विट्ठल मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसके 56 संगीत स्तंभ यानी म्युजिकल पिलर्स हैं, जिन्हें सारेगामा स्तंभ भी कहा जाता है। ये खंभे मंदिर के महामंडप में स्थित हैं। इन स्तंभों की खासियत यह है कि जब इन्हें हल्के हाथ से थपथपाया जाता है, तो इनसे संगीत के सात सुरों जैसी ध्वनि निकलती है। ये खंभे ठोस ग्रेनाइट पत्थर के एक ही टुकड़े से तराशे गए हैं। मुख्य स्तंभ के चारों ओर सात छोटे स्तंभ बने हुए हैं, जो अलग-अलग वाद्ययंत्रों की ध्वनि निकालते हैं। आज भी यह वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय है कि बिना किसी खोखलेपन के, ठोस पत्थर से संगीत की ध्वनि कैसे निकल सकती है। कहा जाता है कि ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेज भी इस रहस्य को सुलझाने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने यह जानने के लिए कि इन खंभों के अंदर क्या है, दो खंभों को काटकर देखा था, लेकिन उन्हें अंदर कुछ नहीं मिला, वे खंभे अंदर से भी ठोस पत्थर ही थे। वे आज भी मंदिर परिसर में देखे जा सकते हैं।

एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव

विट्ठल मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय लिथोफोन्स यानी गूंजने वाले पत्थरों का बेहतरीन उदाहरण है। मंदिर की दीवारों पर घोड़ों, सैनिकों और नर्तकियों की बारीक नक्काशी उस दौर के वैभव और कला के प्रति प्रेम को दिखाती है। मंदिर का प्रांगण इतना बड़ा है कि यहां एक समय में हजारों लोग उत्सव मना सकते थे। शाम के समय जब सूरज की किरणें इन पत्थरों पर पड़ती हैं, तो पूरा मंदिर सुनहरा दिखने लगता है।

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विजयनगर साम्राज्य की विरासत

15वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के राजा देवराय द्वितीय के शासनकाल के दौरान निर्मित इस मंदिर को महान राजा कृष्णदेवराय ने और भव्य बनाया। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार, भगवान विट्ठल को समर्पित है। इसकी दीवारों पर उकेरी गई नक्काशी आज भी जीवंत प्रतीत होती है।

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