malaria : बारिश का मौसम शुरु हो चुका है और जगह जगह जलभराव से मच्छर पनपने का खतरा भी बन गया है। मच्छर जनित रोगों से बचना भी जरुरी है इसलिए सेहत का ध्यान रखने के लिए सावधानी बरतना जरुरी है। इन दिनों में डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं।
बच्चों की सेहत का ध्यान
मलेरिया की बीमारी वैसे तो किसी को भी हो सकती है। पर बच्चों में इसका खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है। बच्चे खेलते समय बाहर ज्यादा समय बिताते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी पूरी तरह विकसित नहीं होती और कई बार वे अपने लक्षण ठीक से बता भी नहीं पाते। यही वजह है कि बच्चों में मलेरिया की पहचान देर से होती है और बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है। बच्चों के अलावा गर्भवती महिलाओं के लिए भी इस बीमारी को जानलेवा माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अच्छी बात ये है कि मलेरिया पूरी तरह से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। यदि माता-पिता इसके शुरुआती संकेतों को पहचान लें, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं तो बच्चों में इस बीमारी के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।
बच्चों में मलेरिया का खतरा
चिकित्सक बताते हैं कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मलेरिया का खतरा वयस्कों की तुलना में अधिक माना जाता है। इसका मुख्य कारण उनकी विकसित होती इम्युनिटी है, जो संक्रमण से प्रभावी ढंग से लड़ने में अभी पूरी तरह सक्षम नहीं होती। यदि बच्चा पहली बार मलेरिया परजीवी के संपर्क में आता है, तो बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है। कुपोषित बच्चों या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उनमें जोखिम और बढ़ जाता है। अगर आपके घर के आसपास गंदा पानी जमा रहता है, साफ-सफाई की कमी है तो ये स्थितियां आपमें भी इस बीमारी के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
बच्चों में मलेरिया की पहचान कैसे करें?
डॉक्टर कहते हैं, मलेरिया की शुरुआत सामान्य वायरल बुखार जैसे लक्षणों के साथ होती है। इसके अलावा बच्चे को तेज बुखार, ठंड लगने-कंपकंपी, अत्यधिक पसीना आने, सिरदर्द और कमजोरी जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। छोटे बच्चों में चिड़चिड़ापन, लगातार रोना, दूध न पीना या सुस्ती भी संकेत हो सकता है कि शरीर स्वस्थ नहीं है। यदि आप ऐसी जगहों पर रहते हैं जहां मलेरिया का खतरा ज्यादा है, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
क्या हो सकते हैं इसके खतरे?
यदि मलेरिया का इलाज समय पर न मिले तो बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। बच्चे में मलेरिया के कारण दौरे पड़ने, बेहोशी, सांस लेने में परेशानी, किडनी-लिवर पर भी असर हो सकता है। गंभीर संक्रमण में शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। छोटे बच्चों में यह स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। अधिकांश मामलों में समय पर इलाज शुरू होने पर बच्चा पूरी तरह ठीक हो जाता है। हालांकि दवा का पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी है।
बच्चों को मलेरिया से कैसे बचाएं?
मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों को पनपने से रोकना और मच्छरों से बचाव करना सबसे जरूरी माना जाता है। बच्चों को रात में मच्छरदानी के अंदर सुलाएं। पूरी बांह के कपड़े पहनाएं और मच्छरों को भगाने वाले तरीके अपनाएं। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, टायर और टंकियों की नियमित सफाई करें। खिड़कियों पर जाली लगाएं और घर के आसपास स्वच्छता बनाए रखें।
यह भी पढ़ें : ANM-LHV संघ की निदेशक MHS से वार्ता, मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन
यह भी देखें: गोनेर गांव की बदहाली! गंदगी, जाम और डंपरों ने किया जीना मुश्किल | Ground Report



