Hasrat Jaipuri : ‘बाहरों फूल बरसाओ…’, ‘लिखे जो खत तुझे…’, ‘तुम मुझे यूं न भुला पाओगे…’, ‘एहसास तेरा होगा मुझ पर…’ ‘जिंन्दगी एक सफर है सुहाना…’ जैसे सैकडों प्रसिद्व गाने लिखने वाले हिंदी सिनेमा के दिग्गज गीतकार हसरत जयपुरी की आज 15 अप्रैल को 104वीं जयंति है। उनके लिखे गानों को सत्तर और अस्सी के दशक में भी युवाओं की पंसद थे वो ही गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं। यह हसरत जयपुरी की लेखनी का कमाल था कि युवा दिलों में उभरते जजबातों को खूबसूरती के साथ शब्दों में ढाला कि उनके लिखे गीत कालजयी बन गए हैं।
आखिरी सांस तक हाथ में कलम और किताब थी
महान गीतकार हसरत जयपुरी के भांजे संगीतकार अनु मलिक ने एक मीडिया को दिए इंटरव्यू में बताया कि मैंने एक चीज देखी है कि आखिरी सांस तक मामा हसरत जयपुरी के हाथ में कलम और किताब थी। उनके बारे जितना सुना है, वह यह है कि मामा अपनी फैमिली को संभालने जयपुर से मुंबई आए थे। यहां चौपाटी पर बैठकर खिलौने बेचते थे। फिर उनको बस कंडक्टर की नौकरी मिली। फिर किसी मुशायरे में बतौर पोएट उनको पृथ्वी राज कपूर मिले। पृथ्वी राज कपूर ने उन्हें रेकमेंड किया है कि मेरे बेटे राज कपूर से मिलिए। शैलेंद्र के साथ , जयपुरी ने 1971 तक राज कपूर की सभी फिल्मों के लिए गीत लिखे
हसरत जयपुरी के लिखे लोकप्रिय गीत
‘जिया बेकरार है ,,’ फ़िल्म बरसात , ‘छोड़ गए बालम.. ‘ फ़िल्म बरसात, ‘इचक दाना बिचक दाना ..’ फ़िल्म श्री 420, ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना .. ‘ फ़िल्म अंदाज़, ‘तेरी प्यारी प्यारी सूरत को .. ‘ फ़िल्म ससुराल, ‘पंख होते तो उड़ आती रे.. ‘ फ़िल्म सेहरा, ‘तेरे खयालों में हम.. ‘ फ़िल्म गीत गया पत्थरों ने, ‘ एहसान तेरा होगा मुझ पर ..’ फ़िल्म जंगली, ‘ तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे .. ‘ फ़िल्म पगला कहीं का, ‘ अजी रूठ कर अब कहां जाएगा..’ फ़िल्म आरजू, ‘सयोनारा सयोनारा .. ‘ फ़िल्म लव इन टोक्यो, ‘ दुनिया बनानेवाले.. ‘ तीसरी कसम, ‘ सुन साहिबा सुन.. ‘ फ़िल्म राम तेरी गंगा मैली, ‘उनके ख्याल आए तो .. ‘ फ़िल्म लाल पत्थर . हसरत जयपुरी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म राजकुमार के लिए उनका लिखा गीत बदन में सितारे लपेटे हुए की प्रेरणा पेरिस में सितारों से सजी साड़ी पहने एक महिला को देखकर मिली थी। उन्होने बताया था कि ये मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर फिल्म संगम की यह रचना तब लिखी गई थी जब उन्हें राधा नाम की एक हिंदू लड़की से प्यार हो गया था।
सादगी पसंद हसरत जयपुरी का संघर्ष
गीतकार हसरत जयपुरी की 104वीं जयंति पर उनके भांजे डब्बू मलिक ने उनसे जुड़ी कई खास यादें मीडिया के साथ साझा कीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डब्बू यानि अनु मलिक ने बताया कि हसरत जयपुरी न सिर्फ बेहतरीन शायर थे, बल्कि अपनी निजी जिंदगी में बेहद सादगी और अपनापन रखने वाले इंसान भी थे। मुंबई के चौपाटी पर खिलौने बेचने और बस कंडक्टर की नौकरी से शुरू हुआ उनका सफर उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के शीर्ष गीतकारों में ले आया। शंकर-जयकिशन और राज कपूर के साथ उनकी जोड़ी ने कई यादगार गाने दिए। आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब रही, जो उनके काम के प्रति जुनून को दिखाती है।
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पान और परफ्यूम के शौकीन
संगीतकार अनु मलिक के अनुसार गीतकार हसरत जयपुरी को किमाम पान और परफ्यूम का बड़ा शौक था। उसी तरह उनकी खुशबूदार पर्सनालिटी भी थी। उनका बहन-बहनोई आदि का काफी बड़ा कुनबा था और वे सबको बड़ा प्यार देते थे। सबका खयाल रखते थे, उनकी यह सबसे बड़ी विशेषता थी। लोगों की जिंदगी के बारे में सोचते थे और उसमें मग्न रहते थे। हम लोग सोचते थे कि उनका अटेंशन लेना भी बहुत मुश्किल था। बिकॉज, वे दिन भर गीत लिखने में लगे रहते थे।
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जयकिशन की डेथ पर दिन भर रोते रहे
अनु मलिक बताते हैं कि मुझे उनकी एक शाम की बात याद है, जो कभी भूलता नहीं हूं। वह यह है कि जय किशन की डेथ हुई थी। उस दिन नेशनल रेडियो पर उनका लिखा गीत पूरे हिंदुस्तान में बज रहा था। वह गीत था- ‘गीतों का कन्हैया चला गया, अब गीत मेरे विरान हुए…’, इसे सुनकर उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। मुझे पता नहीं, शायद इसकी कम्पोजिशन शंकर-जयकिशन जी ने की होगी। लेकिन वह लम्हा कभी भुलाए भुला नहीं जाता। उनके गीतों पर शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने बड़ा दिलकश काम किया है।



