ek din : आमिर खान के बेटे जुनैद खान की फिल्म ‘एक दिन’ रिलीज हुई है, जो एक सादगी भरी प्रेम कहानी पेश करती है। भले ही यह फिल्म प्रभावशाली संगीत नहीं दे पाती, लेकिन इसकी सरलता और मासूमियत इसे एक हल्की-फुल्की, सहज प्रेम कहानी के रूप में पेश करने का प्रयास जरूर करती है। यहां ये भी बता दें कि यह फिल्म 2016 में आई थाई फिल्म वन डे की रीमेक है।
मूवी रिव्यू
आज के फोन और इंटरनेट के दौर में, जहां रिश्ते एक क्लिक, एक स्वाइप या एक नए विंडो जितने आसान विकल्पों में सिमटते जा रहे हैं, ऐसे समय में सुनील पांडे की एक दिन एक सादगी भरी, पारंपरिक लव स्टोरी पेश करती है। फिल्म का पहला भाग सपाट महसूस होता है, जहां घटनाक्रम की कमी खलती है। हालांकि, सेकंड हाफ में कहानी कुछ रफ्तार पकड़ती है और हल्के-फुल्के ट्विस्ट भी सामने आते हैं। लेकिन एक प्रभावी लव स्टोरी के लिए जरूरी मजबूत कॉन्फ्लिक्ट यहां पूरी तरह उभर नहीं पाता। एक दिन के लिए याददाश्त खोने वाले पहलू को भी फिल्म में काफी सुविधाजनक ढंग से इस्तेमाल किया गया है, जिससे गहराई थोड़ी कम महसूस होती है। स्क्रीनप्ले में कसावट की गुंजाइश रह जाती है और संगीत जो आमतौर पर लव स्टोरी की जान है, इस बार राम संपथ के कंपोजिशन और अरिजीत सिंह की आवाज के बावजूद अपेक्षित असर नहीं छोड़ पाता। हालांकि, ‘एक दिन’ और ‘ख्वाब देखूं’ जैसे गाने मधुर हैं, लेकिन वह यादगार जादू नहीं जगा पाते।
इसके विपरीत, मनोज लोबो की सिनेमैटोग्राफी फिल्म की बड़ी खूबी बनकर उभरती है, जहां जापान की बर्फीली वादियों की खूबसूरती आंखों को सुकून देती है। क्लाइमैक्स थोड़ा जल्दबाजी में समेटा हुआ लगता है।
अभिनय
अभिनय के मामले में फिल्म मजबूत नजर आती है। लीड एक्टर्स ने अपने किरदारों के साथ पूरी ईमानदारी बरती है। जुनैद खान ने दब्बू और साधारण लड़के के किरदार को सहजता से निभाया है और अपने अंदाज में उसे विश्वसनीय बनाया है। साई पल्लवी इस फिल्म से अपना बॉलीवुड डेब्यू करती हैं और मीरा के रूप में पूरी तरह जंचती हैं। उनका नैचुरल अभिनय और नो-मेकअप लुक किरदार को एक सादगी और सचाई देता है, जो फिल्म की टोन के साथ अच्छी तरह मेल खाता है। लेकिन उनका कैरेक्टराइजेशन और गहरा हो सकता था। कुणाल कपूर अपनी भूमिका में ठीक-ठाक प्रभाव छोड़ते हैं, हालांकि उनके किरदार को भी और गहराई मिल सकती थी। बाकी के सहायक कलाकार भी अपना काम ठीक से निभाते हैं, लेकिन कहानी में उनके लिए ज्यादा स्कोप नहीं है, इसलिए उनका प्रभाव सीमित रह जाता है।
‘एक दिन’ की कहानी
कहानी दिनेश उर्फ डीनो (जुनैद खान) और मीरा (साई पल्लवी) की है, जो एक ही ऑफिस में काम करते हैं। आईटी डिपार्टमेंट का दिनेश एक दब्बू, साधारण-सा लड़का है, जिसे लोग अक्सर नोटिस तक नहीं करते। वह मजाक में कहता है कि उसे देखने के बाद लोग उसे भूल जाते हैं। वह मीरा से प्यार तो करता है, लेकिन खुद को उसके लायक नहीं समझता, इसलिए कभी अपने जज़्बात जाहिर नहीं कर पाता। उधर, मीरा जो जापानी कल्चर की डाई हार्ट फैन है, अपने बॉस नकुल (कुणाल कपूर) से प्यार करती है, जो अपनी शादी से असंतुष्ट होने का दिखावा कर उससे नए रिश्ते का वादा करता है। जापान की ही एक ऑफिस ट्रिप के दौरान सच सामने आता है कि नकुल की शादीशुदा जिंदगी बिल्कुल ठीक है और उसकी पत्नी प्रेग्नेंट है। इस धोखे से मीरा का दिल टूट जाता है। नशे की हालत में उसका एक्सीडेंट हो जाता है। अस्पताल में पता चलता है कि मीरा को टीजीए (ट्रांसिएंट ग्लोबल एम्नेशिया) हो गया है। यह शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें वह एक दिन के लिए अपना अतीत भूल जाती है। यही एक दिन दिनेश को उसके करीब आने और ऐसे एहसास को जीने का मौका देता है, जो दोनों की जिंदगी बदल सकते हैं।
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