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अब वैदिक छात्रों को भी मिलेगा इंजीनियरिंग की पढाई का दर्जा,जाने AICTE का बड़ा फैसला

अब वैदिक छात्रों को भी मिलेगा इंजीनियरिंग की पढाई का दर्जा,जाने AICTE का बड़ा फैसला
AICTEVedicAdmission: AICTE ने वैदिक शिक्षा बोर्ड के छात्रों के लिए इंजीनियरिंग में प्रवेश का रास्ता खोला: बड़ा फैसलादेश की तकनीकी शिक्षा को नियंत्रित करने वाली प्रमुख संस्था ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) ने एक महत्वपूर्ण और चर्चित निर्णय लिया है। अब महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड (MSRVSSB) से पढ़ाई करने वाले छात्रों को इंजीनियरिंग (बी.टेक) जैसे तकनीकी कोर्स में प्रवेश के लिए अन्य बोर्डों (जैसे CBSE, राज्य बोर्ड आदि) के छात्रों के बराबर माना जाएगा।
यह फैसला 28 जनवरी 2026 को AICTE के सलाहकार एन.एच. सिद्धलिंगा स्वामी द्वारा जारी पत्र के माध्यम से सभी तकनीकी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, राज्य सरकारों और देशभर के लगभग 9,000 AICTE-अनुमोदित कॉलेजों को भेजा गया है। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यदि MSRVSSB से उत्तीर्ण छात्र निर्धारित योग्यता (जैसे फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स में आवश्यक अंक) पूरी करते हैं, तो उन्हें इंजीनियरिंग प्रवेश से वंचित नहीं किया जाए।

कौन सा बोर्ड है चर्चा में?

ह मामला महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड (MSRVSSB) से जुड़ा है, जो वेदों और संस्कृत पर आधारित शिक्षा प्रदान करता है। अब तक इस बोर्ड के छात्रों को तकनीकी शिक्षा में दाखिला लेने में कठिनाई आती थी, क्योंकि उनके प्रमाण-पत्रों को सामान्य बोर्डों के समकक्ष नहीं माना जाता था।AICTE ने अब इस बोर्ड के दो प्रमुख प्रमाण-पत्रों को मान्यता दी है:
  • वेद भूषण → कक्षा 10 के समकक्ष
  • वेद विभूषण → कक्षा 12 के समकक्ष

यह मान्यता एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) द्वारा पहले से दी गई समकक्षता पर आधारित है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने भी MSRVSSB को एक नियमित स्कूल बोर्ड के रूप में मान्यता प्रदान की है, जिससे इसके प्रमाण-पत्र अब केंद्रीय और राज्य बोर्डों के बराबर माने जाते हैं।

वैदिक शिक्षा का पाठ्यक्रम कैसा है?

MSRVSSB का पाठ्यक्रम मुख्य रूप से वेदों पर केंद्रित है। इसमें शामिल प्रमुख विषय:

  • वेदों के मंत्र, श्लोक और उनके अर्थों का गहन अध्ययन तथा याद करना
  • संस्कृत भाषा
  • इसके अलावा कुछ आधुनिक विषय जैसे अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और कंप्यूटर की बेसिक पढ़ाई भी कराई जाती है।

AICTE के नियमों के अनुसार, बी.टेक में प्रवेश के लिए कक्षा 12 में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स (PCM) पढ़ना अनिवार्य है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वैदिक बोर्ड के छात्र यदि यह योग्यता पूरी करते हैं, तो उन्हें अन्य छात्रों की तरह ही अवसर मिलेगा।

इस फैसले से क्यों शुरू हुई बहस?

यह निर्णय स्वागतयोग्य होने के साथ-साथ विवादास्पद भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में हर साल 30-40% सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में निजी कॉलेज वैदिक बोर्ड के छात्रों को दाखिला देकर अपनी सीटें भर सकते हैं।
  • इससे कॉलेजों की आय बढ़ेगी, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि वैदिक पाठ्यक्रम में आधुनिक विज्ञान और गणित पर कम जोर होता है (हालांकि PCM योग्यता पूरी करने की शर्त है)।
  • कुछ रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख है कि पहले के समान निर्णयों (2022 में भी AICTE ने ऐसा ही निर्देश दिया था) पर सिलेबस की जांच न होने की आलोचना हुई थी।

यह फैसला वैदिक शिक्षा को मुख्यधारा की तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो हजारों छात्रों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा। हालांकि, प्रवेश प्रक्रिया में PCM जैसे विषयों में न्यूनतम योग्यता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण रहेगा।क्या आप इस फैसले से सहमत हैं? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं!

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