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हंगरी में सत्ता परिवर्तन: अमेरिका और रूस को झटका, भारत के लिए क्या मायने?

हंगरी में सत्ता परिवर्तन: रूस-अमेरिका को झटका

यूरोप के प्रमुख देश हंगरी में लंबे समय बाद बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। हाल ही में हुए आम चुनावों में पीटर मैग्यार की तिस्जा पार्टी ने शानदार जीत हासिल करते हुए विक्टर ओर्बन की फिडेज पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया है।

तिस्जा पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिलने के बाद अब देश में नई नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बदलाव की संभावना बढ़ गई है।

EU से फंडिंग का रास्ता होगा आसान

नई सरकार के गठन के साथ ही यूरोपीय संघ (EU) से रुकी हुई अरबों यूरो की फंडिंग जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
पीटर मैग्यार ने कहा कि उनकी सरकार जल्द ही EU के साथ समझौता कर फंडिंग को अनब्लॉक कराने का प्रयास करेगी।

साथ ही, उन्होंने संविधान में संशोधन कर प्रधानमंत्री के कार्यकाल को अधिकतम दो बार तक सीमित करने की बात भी कही है।

रूस के लिए क्यों झटका?

व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाने वाले विक्टर ओर्बन ने अपने कार्यकाल में रूस के साथ मजबूत संबंध बनाए रखे थे।

  • रूस से तेल और गैस खरीद जारी रखी
  • यूक्रेन को मिलने वाले 90 अरब यूरो के लोन को रोका
  • 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी रूस से करीबी बनाए रखी

नई सरकार रूस की आक्रामक नीतियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत दे रही है। ऐसे में यह बदलाव मॉस्को के लिए रणनीतिक झटका माना जा रहा है।

यूक्रेन के लिए राहत

वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने पीटर मैग्यार को जीत की बधाई देते हुए सहयोग की इच्छा जताई है।

नई सरकार के साथ यूक्रेन को यूरोप में अधिक समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिससे उसके लिए आर्थिक और सैन्य सहयोग का रास्ता आसान हो सकता है।

अमेरिका और ट्रंप कैंप के लिए भी झटका

डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों ने विक्टर ओर्बन का खुलकर समर्थन किया था।

ओर्बन की हार को ट्रंप के MAGA कैंप के लिए एक राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि हंगरी को यूरोप में उनके प्रमुख सहयोगी के रूप में देखा जाता था।

भारत के लिए क्या मायने?

भारत ने इस राजनीतिक बदलाव का स्वागत किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीटर मैग्यार और उनकी पार्टी को जीत की बधाई देते हुए द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।

भारत और हंगरी के बीच पहले से ही मजबूत संबंध हैं, जो इन क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे हैं:

  • व्यापार
  • शिक्षा
  • संस्कृति
  • प्रौद्योगिकी

मध्य यूरोप में हंगरी भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और नई सरकार के साथ सहयोग और गहरा होने की संभावना है।

निष्कर्ष

हंगरी में सत्ता परिवर्तन सिर्फ एक घरेलू राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति पर भी पड़ेगा।

जहां रूस और अमेरिका के लिए यह एक झटका माना जा रहा है, वहीं यूक्रेन और यूरोपीय संघ के लिए यह सकारात्मक संकेत है। भारत के लिए यह अवसर है कि वह नई सरकार के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करे।

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