TMC-Congress Merger: पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार राजनीतिक संकट से जूझ रही है. पार्टी के कई सांसदों और नेताओं की बगावत के बीच दिल्ली में बीते 48 घंटों के दौरान ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की कांग्रेस नेतृत्व से लगातार मुलाकातों ने नई राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया है. TMC और कांग्रेस में कुछ खिचड़ी पक रही है या फिर ममता बनर्जी ने बची-खुची टीएमसी को कांग्रेस में विलय का मन बना लिया है. इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई है.
TMC को कांग्रेस में विलय की क्या हो सकती है वजह?
क्या टीएमसी के सामने खड़ा है अस्तित्व का संकट: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में हार के बाद टीएमसी को लगातार झटके लग रहे हैं.पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसदों के अलग गुट बनाने की चर्चाओं ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी सांसद अलग समूह बनाते हैं तो संसद में टीएमसी की स्थिति कमजोर हो सकती है.ऐसे हालात में कांग्रेस के साथ नजदीकी पार्टी के लिए राजनीतिक और कानूनी सहारा बन सकती है.
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बचाने की चुनौती: राजनीतिक संकट के बीच टीएमसी के राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे और चुनाव चिह्न पर भी खतरे की चर्चा हो रही है. माना जा रहा है कि कांग्रेस के साथ मजबूत संसदीय समन्वय या किसी बड़े राजनीतिक समझौते से टीएमसी के बचे हुए सांसदों को राष्ट्रीय स्तर पर एक नया मंच मिल सकता है.
अभिषेक बनर्जी के भविष्य पर भी नजर: बंगाल की नई राजनीतिक परिस्थितियों में अभिषेक बनर्जी की भूमिका और भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं.कांग्रेस नेतृत्व से बढ़ती नजदीकियों को राष्ट्रीय राजनीति में उनके लिए संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है.
TMC के बागी रिजू दत्ता का बड़ा दावा
टीएमसी के निष्कासित नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि ममता बनर्जी के पास कांग्रेस के साथ जाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं. उन्होंने कहा कि इससे टीएमसी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाए रखने और अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि, टीएमसी या कांग्रेस की ओर से अभी तक किसी संभावित विलय को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
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