India Inflation Estimates: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बढ़ती वैश्विक चुनौतियों और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया है. पहले यह अनुमान 4.6 फीसदी था.आरबीआई का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये की कमजोरी और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती हैं.वहीं आर्थिक विकास की रफ्तार भी प्रभावित होने की आशंका जताई गई है,जिसके चलते केंद्रीय बैंक ने जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में भी कटौती की है.
साल के अंत में रहेगा ज्यादा दबाव
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में औसत महंगाई दर 5.1 फीसदी रहने का अनुमान है.केंद्रीय बैंक के अनुसार जून तिमाही में महंगाई 4.2 फीसदी रह सकती है,जबकि सितंबर तिमाही में यह बढ़कर 5.1 फीसदी पहुंचने का अनुमान है.दिसंबर तिमाही में महंगाई 5.9 फीसदी तक जा सकती है,जबकि मार्च 2027 तिमाही में इसके 5.4 फीसदी रहने की संभावना है.
कच्चे तेल और आयात लागत ने बढ़ाई चिंता
आरबीआई के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं.बीते दो महीनों में भारतीय बास्केट के तहत कच्चे तेल की औसत कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल रही है. साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने से आयात महंगा हो रहा है, जिससे ईंधन, परिवहन और उपभोक्ता वस्तुओं की लागत बढ़ने का खतरा है.
अल नीनो और कमजोर मानसून का असर
मौसम विभाग ने इस साल मजबूत अल नीनो की आशंका जताई है. इससे सामान्य से कम बारिश हो सकती है, जिसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। दाल, सब्जियां और अन्य खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित होने से खाद्य महंगाई बढ़ सकती है. ग्रामीण क्षेत्रों में मांग पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है.
जीडीपी ग्रोथ अनुमान में कटौती
महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए आरबीआई ने आर्थिक विकास दर के अनुमान भी घटा दिए हैं. पहली तिमाही का अनुमान 6.8 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी, दूसरी तिमाही का 6.7 फीसदी से 6.3 फीसदी, तीसरी तिमाही का 7 फीसदी से 6.5 फीसदी और चौथी तिमाही का 7.2 फीसदी से 6.8 फीसदी कर दिया गया है. इससे साफ है कि आने वाले समय में महंगाई और विकास दर दोनों अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बने रह सकते हैं.
“कम नुकसान के साथ इन झटकों का सामना कर लेंगे”
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में ग्लोबल इकॉनमी पर बहुत ज़्यादा अनिश्चितता,अहम ट्रेड रूट और सप्लाई चेन में रुकावट,बाजार में ज़्यादा उतार-चढ़ाव और बिजनेस को लेकर सावधानी भरे माहौल का असर पड़ा है. मैं सबसे पहले इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि भारतीय इकॉनमी इस ग्लोबल उथल-पुथल के दौर में पहले के ऐसे ही दौरों की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी हालात के साथ दाखिल हुई है. हमें भरोसा है कि हम कम से कम नुकसान के साथ इन झटकों का सामना कर लेंगे.



