Women Reservation Bill Controversy: कांग्रेस महासचिव व सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने आज दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि कल लोकतंत्र की एक बड़ी जीत हुई है. मोदी सरकार ने लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे को बदलने की साजिश की थी, जिसे हमने हरा दिया. ये संविधान की जीत है, देश की जीत है, विपक्ष की एकता की जीत है- जो सत्ता पक्ष के नेताओं के चेहरे पर साफ दिख रही थी.
“इसके लिए सरकार ने महिलाओं का इस्तेमाल किया”
प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने-अपने भाषणों में कहा कि अगर विपक्ष इस मुद्दे पर सहमत नहीं होगा तो न कभी चुनाव जीत पाएगा, न ही सत्ता में आ पाएगा. इन बातों से ही साफ़ हो गया कि सरकार की मंशा क्या थी. मेरा मानना है कि सरकार द्वारा जो साजिश रची गई, उसका उद्देश्य सत्ता हासिल करना है. इसके लिए सरकार ने महिलाओं का इस्तेमाल किया. सरकार चाहती थी महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष यह बिल पारित करवा दे, ताकि उन्हें मनमाने तरीके से परिसीमन की आजादी मिल जाए. जिससे मोदी सरकार को जातिगत जनगणना का सहारा न लेना पड़े.
“साजिश सत्ता में बने रहने के लिए रची गई”
कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा कि मेरे ख्याल से पूरी साजिश सत्ता में बने रहने के लिए रची गई. परिसीमन 2029 तक नहीं हो पाएगा. वह महिलाओं के नाम पर किया जा रहा था. ताकि उन्हें सत्ता में बने रहने की स्वतंत्रता मिल जाए. मोदी सरकार का मानना था कि अगर बिल पारित होगा तो उनकी जीत होगी और बिल पारित नहीं हुआ तो विपक्ष को महिला विरोधी बता देंगे. बीजेपी ऐसा कर खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती थी. उन्होंने कहा कि महिलाएं देख रही है. उन्नाव हाथरस, मणिपुर में देखा. आप संसद में खड़े होकर कह रहे हैं कि आप उनके मसीहा बनना चाहते हैं. यह साफ है कि यह महिलाओं के लिए नहीं परिसीमन के लिए था. मैं खुश हूं कि विपक्ष ने उनका विरोध किया. ब्लैक डे उनके लिए है क्योंकि उन्हें धक्का लगा है कि यह हो कैसे गया.
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“गुमराह करने की कोशिश मत किजिए”
उन्होंने कहा कि आज की महिलाओं की समस्याएं बढ़ रही है, उनका संघर्ष बढ़ रहा है वो बेवकूफ नहीं है. वो सबकुछ देख रही है. मीडियाबाजी..पीआर अब नहीं चलेगी. कुछ ठोस करना है तो आप 2023 में जो सर्व सहमति से जो विधेयक पारित हुआ था, सारे दलों ने उसका समर्थन किया था, उसे लाइए. महिलाओं को हक दिजिए. मगर आप उनको घुमाकर दूसरी चीजों से जोड़कर गुमराह करने की कोशिश मत किजिए. हम सब तैयार हैं.
बता दें कि शुक्रवार को लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल केंद्र सरकार लोकसभा में पास नहीं करवा पाई. इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधना था. लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई. संसद में उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले, पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े. जबकि बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमनत की आवश्यकता होती है. 528 का दो तिहाई 352 होता है. इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया.



