Parliament Budget Session: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वे मोदी तेरी कब्र खुदेगी के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहे हैं. वे इसका सपना देखते हैं और लोकतंत्र की बात करते हैं. वे ‘मोहब्बत की दुकान’ के साइनबोर्ड लगाते हैं. क्या सार्वजनिक जीवन में ऐसी नफरत होती है? उनकी सरकार रिमोट से चलती थी. मेरी सरकार भी रिमोट से चलती है. 140 करोड़ लोग मेरा रिमोट हैं.
“उनका अहंकार चरम पर है”
प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि बुधवार को जो हुआ कांग्रेस के ‘युवराज’ जिनका शातिर दिमाग है, उन्होंने इस सदन के एक सांसद को ‘गद्दार’ कहा. उनका अहंकार चरम पर है. उन्होंने कांग्रेस छोड़ने वाले किसी और को गद्दार नहीं कहा. लेकिन उन्होंने उस सांसद को गद्दार इसलिए कहा क्योंकि वे एक सिख हैं. यह सिखों का अपमान था, गुरुओं का अपमान था. यह सिखों के प्रति उस नफरत का इजहार था जो कांग्रेस में भरी हुई है. वे उस परिवार के सदस्य हैं जिसने देश के लिए खुद को कुर्बान कर दिया. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसे लोग कांग्रेस को डुबो देंगे.
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“ये फर्क है उनकी सोच और हमारे सोच में”
वहीं पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी-एनडीए का समस्याओं का समाधान ढूंढने का तरीका अलग है, कांग्रेस और हमारे बीच बहुत बड़ा फर्क है. हमारा मानना है कि 140 करोड़ नागरिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं. हमें नागरिकों और उनकी काबिलियत पर भरोसा है. यही लोकतंत्र की असली ताकत है. लेकिन कांग्रेस नागरिकों को ही एक समस्या मानती है. मैं देश के लोगों के लिए नेहरू जी और इंदिरा जी की सोच के बारे में बात करना चाहूंगा. इंदिरा जी एक बार ईरान गई थीं, वह वहां भाषण दे रही थीं. अपने भाषण में उन्होंने नेहरू जी के साथ हुई बातचीत का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, “जब नेहरू जी से पूछा गया कि उनकी सामने कितनी समस्याएं हैं तो मेरे पिता ने जवाब दिया था ’35 करोड़, जो उस समय हमारी आबादी थी. अब आबादी 57 करोड़ है, इसलिए मेरी समस्याए की संख्या उतनी ही है. क्या कोई ऐसा हो सकता है जो अपने ही नागरिकों को समस्या समझे? ये फर्क है उनकी सोच और हमारे सोच में.
PM मोदी ने TMC को भी घेरा
प्रधानमंत्री ने कहा कि TMC के साथियों ने बहुत कुछ कहा. लेकिन उन्हें अपने अंदर झांकना चाहिए. एक क्रूर सरकार गिरावट के सभी पैमानों पर नए रिकॉर्ड बना रही है. लेकिन वे हमें यहां व्याख्यान दे रहे हैं. वहां के लोगों का भविष्य अंधेरे में डूब रहा है लेकिन उन्हें (राज्य सरकार) कोई परवाह नहीं है. सत्ता में रहने के अलावा उनकी कोई आकांक्षा नहीं है. वे यहां लेक्चर दे रहे हैं. दुनिया के समृद्ध देश अपने देश से अवैध निवासियों को बाहर निकाल रहे हैं. लेकिन हमारे देश में, अदालतों पर दबाव डाला जा रहा है. हमारे देश के युवा ऐसे लोगों को कैसे माफ कर सकते हैं जो घुसपैठियों की वकालत करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं?
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