India First Hydrogen Train: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज(17 जुलाई) देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच चली. भारत दुनिया का 5वां देश बन गया है जिसने हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ट्रेन शुरू की है. भारत से पहले जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में हाईड्रोजन ट्रेनें चल रही है. बता दें कि 10 कोच वाली यह ट्रेन जींद सोनीपत रूट पर 14 स्टेशनों के बीच अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी. इस ट्रेन का किराया 5 रुपए से 25 रुपए के बीच रखा गया है. करीब 2 घंटे में यह ट्रेन 89 किलोमीटर का सफर तय करेगी.
ट्रेन के बारे में क्या बोले लोको पायलट?
इस नई ट्रेन के बारे में जानकारी देते हुए लोको पायलट राजेश कुमार ने बताया कि ये नई तकनीक है. इसमें ज्यादा पावर है. साउंड प्रूफ है. वातावरण में कोई प्रदूषण नहीं है और इसकी गति बहुत अच्छी है. हम ट्रेन मैनेजर से बात कर सकते हैं और घोषणा कर सकते हैं. वहीं सहायक लोको पायलट गगनदीप सिंह ने कहा कि हमारी बहुत अच्छी ट्रेनिंग हुई है. चेन्नई से आए लोगों ने हमें इस ट्रेन के बारे में जानकारी दी. 3200 हॉर्स पावर की ट्रेन है. इसमें 8 ट्रेवल कार रहेगी और 2 पावर कार रहेगी. इसमें आधुनिक सुरक्षा के उपकरण हैं. आग की स्थिति ऑटोमैटिक फायर एक्सटिंग्विशर लगे हैं, 26 सेंसर हैं. बहुत अच्छा अनुभव है.
कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन?
हाइड्रोजन ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर चलती है. इसमें हाइड्रोजन गैस और ऑक्सीजन की रासायनिक क्रिया से बिजली बनती है और वही बिजली ट्रेन के मोटर को चलाती है. सबसे पहले हाइड्रोजन को रेल के ट्रैंक में स्टोर किया जाता है. इसके बाद फ्यूल सेल में हाईड्रोजन और ऑक्सीजन मिलते है, इस क्रिया से बिजली बनती है और बिजली ट्रेन को आगे बढ़ाने का काम करती है. हम इस प्रक्रिया को उदाहरण के जरिए समझ सकते हैं जैसे बैटरी बिजली देती है वैसे ही हाइड्रोजन ट्रेन में फ्यूल सेल खुद बिजली बनाकर ट्रेन चलाता है.
“भारत दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है”
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज पीएम मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया. इस कार्यक्रम में मैं आपका बहुत स्वागत करता हूं. आज का दिन ऐतिहासिक दिन है. एक ऐसी तकनीकी उपलब्धि भारत ने हासिल की है जो इसलिए संभव हो पाई क्योंकि भारत के नेतृत्व ने एक ऐसा बड़ा संकल्प लिया कि हाइड्रोजन की पूरी तकनीकी देश में विकसित करेंगे और आज ये दिन उस संकल्प के सिद्धि का दिन है. आज इस उपलब्धि के साथ भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया जहां हाइड्रोजन ट्रेन की पूरी तकनीक उपलब्ध है.
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